Covid 19

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Wednesday, July 15, 2020

कोरोना वैक्सीन पर आज मिल सकती है अच्छी खबर, ट्रायल के नतीजों को लेकर हो सकती है सकारात्मक घोषणा


लंदन, रायटर। कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग के बीच गुरुवार को अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना की संभावित वैक्सीन के प्रारंभिक ट्रायल के नतीजों को लेकर सकारात्मक घोषणा हो सकती है। सूत्रों के हवाले से आइटीवी के राजनीतिक संपादक रॉबर्ट पेस्टोन ने यह जानकारी दी है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों द्वारा विकसित इस वैक्सीन के तीसरे चरण में व्यापक पैमान पर मानव ट्रायल किया जा रहा है। यह आकलन किया जा रहा है कि क्या यह वैक्सीन कोरोना से रक्षा कर सकती है या नहीं। हालांकि, अभी इसके पहले चरण के ट्रायल के नतीजे भी नहीं मिले हैं। पहले चरण में वैक्सीन की सुरक्षा और उसके प्रतिरोधक क्षमता का आकलन किया गया है।

इसके नतीजे इस महीने के आखिर तक प्रकाशित किए जाने की उम्मीद है।

वैक्सीन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने भी सबको चौंकाया

वहीं, दूसरी ओर कोरोना वैक्सीन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ट्वीट कर दुनियाभर के लोगों को चौका दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा 'वैक्सीन को लेकर एक अच्छी खबर है।' ट्रंप के इस ट्वीट के बाद दुनियाभर के लोग अमेरिका में कोरोना की सफल वैक्सीन बनाए जाने को लेकर आशंकित हैं। ट्रंप के इस ट्वीट पर यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि मॉडर्ना इंक (Moderna Inc) की कामयाबी पर उनका यह रिएक्शन आया है।

गौरतलब है कि विश्वभर में कोरोना महामारी के बीच सारे देश कोरोना की वैक्सीन पर रिसर्च कर रहे हैं। हांलाकि अभी आधिकारिक तौर पर किसी ने भी कोरोना वैक्सीन की घोषणा नहीं की है। विश्व के अधिकतर देशों में अभी कोरोना वैक्सीन पर पर परीक्षण किए जा रहे हैं। वहीं, अब ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सटी कोरोना के अपने प्रांरभिक ट्रायल को लेकर सकारात्कमक घोषणा करने वाली है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पिछले कई महीनों से वैक्सीन पर काम कर रही है।

Tuesday, July 14, 2020

कोरोना वायरस संकट दिन पर दिन बद से बदतर होता जा सकता है, WHO ने चेतावनी दी

जेनेवा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सोमवार को चेतावनी (warned) दी है कि यदि सभी देश बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल सावधानियों (Basic health care precautions) का पालन नहीं करते हैं तो तेजी से फैलती कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के दिन पर दिन और भी बदतर होते जाने की संभावना है.

जिनेवा (Geneva) में डब्ल्यूएचओ (WHO) मुख्यालय से एक वर्चुअल ब्रीफिंग (Virtual Briefing) में महानिदेशक (Director) टेडरोस एडहानोम गेब्रेयेसुस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने कहा, "मुझे बिना लाग-लपेट कहने दें, बहुत सारे देश गलत दिशा में जा रहे हैं, वायरस सार्वजनिक जीवन (Public Life) का दुश्मन नंबर एक बना हुआ है."

दुनिया भर में कोरोना रोगी 1.3 करोड़ हुए
उन्होंने कहा, "यदि बुनियादी बातों का पालन नहीं किया जाता है, जो इस महामारी को जाने को वापस भेजने का एकमात्र तरीका है, तो यह खराब और बदतर से बदतर होता जायेगा.
लेकिन इसे इस तरह नहीं होना चाहिए."रॉयटर्स की सूची के मुताबिक सोमवार को दुनिया भर में संक्रमण 1.3 करोड़ से ऊपर चला गया. इस महामारी में सिर्फ पांच दिनों में दस लाख से अधिक रोगियों की बढ़ोत्तरी हो गयी. यह महामारी अब तक 5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत का कारण बन चुकी है.

भारत में कुल आंकड़े 9 लाख के पार हुए
वहीं भारत में अब तक कोविड-19 (Covid-19) के 9 लाख से ज्यादा मामले हो गए हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के सोमवार सुबह के अपडेट के मुताबिक देश में 24 घंटे में कोरोना के रिकॉर्ड 28 हजार 701 नए मरीज मिले जिसके बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 8 लाख 78 हजार 254 हो गई थी. अब ये आंकड़ा 9 लाख को पार कर गया है. देश में कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या भी 23 हजार 173 हो गई है. देश में फिलहाल 3 लाख एक हजार 609 एक्टिव केस हैं.

वहीं इस बीच राहत की बात ये है कि देश में रिकवरी रेट (Recovery Rate) लगातार बढ़ रहा है. केंद्र ने सोमवार को कहा कि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड-19 से मरीजों के ठीक होने की दर राष्ट्रीय औसत 63.02 प्रतिशत से बेहतर है. केंद्र ने कहा कि उसके द्वारा राज्य सरकारों के समन्वय में उठाए गए कदमों से मरीजों के ठीक होने की दर में 'क्रमिक बढ़ोतरी' हुई.

क्यूबा में कोरोना डेथ रेट कम करने वाली दवा को भारत में भी मिली हरी झंडी

नई दिल्ली. कोरोना के इलाज के लिए DCGI यानी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने Biocon की दवा टोलीजुमैब Itolizumab Injection (आइटोलीजुमैब) को इजाजत दे दी है. DCGI के मुताबिक कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए इस इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है. कोरोना मरीजों पर क्लिनिकल ट्रायल के बाद संतोषजनक नतीजे देखे गए हैं. ये इंजेक्शन पिछले कई साल से सिरॉसिस के मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. ये दवा क्यूबा में कोरोना डेथ रेट कम करने के लिए काफी चर्चित रही है. इसे लेकर टोलीजुमैब बनाने वाली कंपनी Biocon की एक्जिक्यूटिव चेयरपर्सन किरण मजमूदार शॉ ने न्यूज़18 के साथ खास बातचीत की है.
कोविड-19 असाधारण परिस्थिति है'
किरण शॉ ने कहा है कि कोरोना जैसी असाधारण स्थितियों में जिंदगियां बचाने के लिए सही इलाज की जरूरत है. हम अगले कुछ दिनों में दस लाख का आंकड़ा छूने वाले हैं. इस वक्त हमारे सामने बड़ा सवाल ये है कि अगर इन्फेक्शन रेट ऊपर भी चला जाए तो क्या हम डेथ रेट कम कर सकते हैं? ऐसे समय में टोलीजुमैब दवा काफी कारगर साबित हो सकती है. हालांकि अभी इसका बड़े स्तर पर ट्रायल नहीं किया जा सका है. DCGI ने इस दवा के इस्तेमाल की छूट मॉडरेट से लेकर गंभीर मरीजों तक के लिए दी है.

दवा की कीमत पर क्या बोलीं किरण शॉटोलीजुमैब की कीमत को लेकर किरण शॉ ने कहा है कि हमें इस दवा की उपयोगिता भी देखनी होगी. इस वक्त हम जिंदगियां बचाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में अगर आप किसी मरीज को आईसीयू में रखेंगे तो उसका खर्च भी कहीं ज्यादा आ सकता है. सरकार मान रही है कि ये दवा लोगों के लिए काफी अफोर्डेबल है.

'क्यूबा में डेथ रेट कम हुई'
शॉ ने कहा है कि क्यूबा में भी इस दवा के इस्तेमाल से डेथ रेट काफी कम हुई है. हमने ट्रायल के दौरान इस दवा का इस्तेमाल मॉडरेट से लेकर गंभीर मरीजों तक पर किया है. नतीजे बेहतर निकले हैं. अगर क्यूबा इस दवा का इस्तेमाल कर अपने यहां डेथ रेट कम रखने में कामयाब हो सकता है तो हम क्यों नहीं.

'हेल्थ सेक्टर में और निवेश करना होगा'
किरण शॉ ने कहा है कि हमें हेल्थ केयर सेक्टर में और ज्यादा इन्वेस्टमेंट करना होगा. अन्य क्षेत्रों की तरह इस क्षेत्र को भी इन्सेंटिव की जरूरत है. एक समय में जिस तरह आईटी सेक्टर पर ध्यान देकर बड़ा बनाया गया है कुछ वैसा ही हेल्थ सेक्टर भी किया जा सकता है.

देश में कोरोना वायरस के सर्वाधिक 28701 नए मामले आए सामने; संक्रमितों की संख्या 878254 पहुंची

नयी दिल्ली: देश में सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण के सर्वाधिक 28,701 मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या सोमवार को बढ़कर 8,78,254 हो गई जबकि संक्रमण से उबरने की दर सुधरकर 63.02 फीसद हो गयी। केद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार 19 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में मरीजों के स्वस्थ होने की दर राष्ट्रीय औसत दर 63.02 फीसद से अधिक है। मंत्रालय के सुबह आठ बजे तक के आंकड़े के अनुसार इस वायरस से 500 और लोगों की मौत के बाद देश में मृतकों की कुल संख्या 23,174 हो गई।

मंत्रालय के अनुसार अब तक 5,53,470 लोग स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 3,01,609 लोगों का इलाज चल रहा है और एक व्यक्ति देश से बाहर जा चुका है।

यह लगातार चौथा ऐसा दिन है, जब देश में संक्रमण के 26,000 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। केंद्र ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकारों के साथ समन्वय कायम करते हुए उठाये गये कदमों से मरीजों के स्वस्थ होने की दर में 'क्रमिक वृद्धि' आयी है। उसने यह भी कहा कि 30 ऐसे राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश हैं जहां इस बीमारी से मृत्युदर राष्ट्रीय मृत्युदर 2.64 फीसद से कम है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि घर पर पृथकवास के नियमों और मानकों तथा ऑक्सीमीटरों के इस्तेमाल ने बिना लक्षण वाले या हल्के लक्षण वाले मरीजों पर नियंत्रण रखने में मदद की और अस्पतालों पर बोझ भी नहीं बढ़ा। मंत्रालय ने कहा, 'कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिये केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए अति-सक्रिय, पूर्वानुमानित और समन्वित कदमों से कोविड-19 से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में क्रमिक बढ़ोतरी हुई।' सरकार ने कहा कि जांच में इजाफा और समय पर निदान से कोविड-प्रभावित मरीजों के बीमारी के अंतिम चरण में जाने से पहले ही पहचान हो जाती है।

मंत्रालय ने कहा कि निषिद्ध क्षेत्रों और निगरानी कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने से यह सुनिश्चित हुआ कि संक्रमण की दर नियंत्रण में रहे। उसने कहा कि ठीक होने की दर में भी सुधार हुआ है और अब यह 63.02 प्रतिशत है, और 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मरीजों के ठीक होने की दर राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। जिन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मरीजों के ठीक होने की दर राष्ट्रीय दर से ज्यादा है उनमें लद्दाख (85.45 प्रतिशत), दिल्ली (79.98 प्रतिशत) उत्तराखंड (78.77 प्रतिशत), छत्तीसगढ़ (77.68 प्रतिशत), हिमाचल प्रदेश (76.59 प्रतिशत), हरियाणा (75.25 प्रतिशत), चंडीगढ़ (74.6 प्रतिशत), राजस्थान (74.22 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (73.03 प्रतिशत) और गुजरात (69.73 प्रतिशत) शामिल हैं। इसके अलावा त्रिपुरा (69.18 प्रतिशत), बिहार (69.09 प्रतिशत), पंजाब (68.94 प्रतिशत), ओडिशा (66.69 प्रतिशत), मिजोरम (64.94 प्रतिशत), असम (64.87 प्रतिशत), तेलंगाना (64.84 प्रतिशत), तमिलनाडु (64.66 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (63.97 प्रतिशत) में भी मरीजों के ठीक होने की दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है।

भारत की मृत्यु दर भी गंभीर मामलों के क्लीनिकल प्रबंधन पर लगातार जोर देने से घटकर 2.64 रह गयी है। एम्स दिल्ली टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से कोविड-19 समर्पित अस्पतालों का मार्गदर्शन करता रहा। संक्रमण के कारण हुई 500 नई मौतों में से 173 महाराष्ट्र में हुई है, जबकि कर्नाटक में 71, तमिलनाडु में 68, दिल्ली में 37, पश्चिम बंगाल में 26, उत्तर प्रदेश में 21, आंध्र प्रदेश में 19, गुजरात में 13, बिहार में 12, जम्मू-कश्मीर में 10, मध्य प्रदेश में नौ, तेलंगाना में आठ, राजस्थान और झारखंड में सात-सात, हरियाणा और पंजाब में चार-चार, ओडिशा में तीन, केरल, गोवा और छत्तीसगढ़ में दो-दो और उत्तराखंड और चंडीगढ़ में एक-एक मौत हुई है। अब तक हुई कुल 23,174 मौतों में से, महाराष्ट्र में सबसे अधिक 10,289 लोगों की मृत्यु हुई, इसके बाद दिल्ली में 3,371, गुजरात में 2,045, तमिलनाडु में 1,966, उत्तर प्रदेश में 934, पश्चिम बंगाल में 932, मध्य प्रदेश में 653, कर्नाटक में 684 और राजस्थान में 510 मौतें हुई हैं। अब तक, तेलंगाना में कोविड-19 से 356 लोगों की मौतें हुई हैं, जबकि आंध्र प्रदेश में 328, हरियाणा में 301, पंजाब में 199, जम्मू-कश्मीर में 179, बिहार में 143, ओडिशा में 64, उत्तराखंड में 47, असम में 35 और केरल में 31 मौतें हुई हैं। झारखंड में 30 मौतें हुई हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में 19, पुडुचेरी में 18, गोवा में 14, हिमाचल प्रदेश में 11, चंडीगढ़ में आठ, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में दो-दो और लद्दाख में एक मौत हुई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 70 प्रतिशत से अधिक मौत मरीजों में अन्य बीमारियों के कारण हुईं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार 12 जुलाई तक 1,18,06,256 नमूनों की जांच हुई है, जिनमें से 2,19,103 नमूनों की जांच रविवार को हुई। प्रति दस लाख पर परीक्षण लगातार बढ़ रहा है और सोमवार को यह 8555.25 था। देश में कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में हैं, जहां मामलों की संख्या 2,54,427 है, इसके बाद तमिलनाडु में 1,38,470 और दिल्ली में 1,12,494 मामले हैं, जबकि गुजरात में 41,820, उत्तर प्रदेश में 36,476, कर्नाटक में 38,843 और तेलंगाना में 34,671 मामले हैं। भाषा राजकुमार वैभव वैभव

Sunday, July 12, 2020

कोविड-19: वैक्सीन बनाने में रूस का बाजी मारने का दावा, कहा- पूरी हो गई टेस्टिंग

मास्को. रूस (Russia) की सेकेनोफ़ यूनिवर्सिटी (Sechenov University) में नये कोरोना वायरस (Novel Coronavitus) की वैक्सीन का वॉलंटियर्स पर क्लीनिकल परीक्षण (Clinical Test) पूरा कर लिया गया है. यूनिवर्सिटी में इस परीक्षण की मुख्य शोधकर्ता इलीना स्मोलयारचुक (Chief Researcher Elena Smolyarchuk) ने बताया कि परीक्षण में सामने आये रिजल्ट में टीका (Vaccine) प्रभावी सिद्ध भी हुआ है.

सेकेनोफ़ यूनिवर्सिटी (Sechenov University) में सेंटर फॉर क्लीनिकल रिसर्च ऑन मेडिकेशन (Center for Clinical Research on Medications) की प्रमुख इलीना स्मोलयारचुक ने बताया, "रिसर्च पूरा कर लिया गया है और इससे साबित हुआ है कि वैक्सीन सुरक्षित है.
वॉलंटियर्स (Volunteers) को 15 जुलाई और 20 जुलाई को डिस्चार्ज (Discharge) कर दिया जायेगा." भारत में रूस के दूतावास ने इस संबंध में ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी और इसे कोविड-19 (Covid-19) के खिलाफ दुनिया की पहली वैक्सीन बताया.
डिस्चार्ज किए जाने के बाद निगरानी में रहेंगे वॉलंटियर्स, रूसी दूतावास ने ट्वीट कर दी जानकारी
यूनिवर्सिटी से डिस्चार्ज किए जाने के बाद वॉलंटियर्स को निगरानी में रखा जायेगा. इस यूनिवर्सिटी में जिस वैक्सीन का परीक्षण किया गया. वह पहले 18 जून को 18 वॉलंटियर्स के एक समूह को दी गई. जबकि वॉलंटियर्स के दूसरे समूह को यह वैक्सीन 23 जून को दी गई.

भारत में भी प्रथम कोरोना वैक्‍सीन तैयार कर ली गई है और यह ट्रायल के चरण में है. भारत के तीन मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन्स ने मिल कर इस कार्य में सफलता हासिल कर ली है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी (National Institute of Virology) और भारत बायोटेक के संयुक्त प्रयास से कोवैक्सीन नाम की एक वैक्‍सीन को तैयार किया गया है.

देश में रिकवरी दर सबसे ज्यादा 63%, तीन दिन से लगातार मिल रहे 25 हजार से अधिक मरीज

लगातार दूसरे दिन देश में 500 से ज्यादा मृतकों की संख्या दर्ज की गई है। इतना ही नहीं संक्रमितों के मिलने की दर में भी इजाफा हुआ है। जबकि, रोजाना सैंपल जांच में वृद्धि नहीं है। तीन दिन से रोजाना 2.80 लाख सैंपल की जांच देश में हो रही है। इनमें से 9.59 फीसदी तक सैंपल संक्रमित मिल रहे थे, पर शनिवार को 10.22 फीसदी पॉजिटिव मिले हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में रिकवरी दर लगातार बढ़ रही है। पहली बार यह दर 63 फीसदी के नजदीक पहुंची है। मंत्रालय ने बताया कि अब तक देश में 62.92 फीसदी संक्रमित मरीज ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। पूरी दुनिया में यह रिकवरी दर भारत की सबसे ज्यादा है।
मंत्रालय के अनुसार, रविवार सुबह तक बीते एक दिन में 28,637 मरीज आए हैं।
इसके अलावा 551 की मौत दर्ज की गई है। इस दौरान, 19,235 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। कुल 8,49,553 केस में 2,92,258 सक्रिय मामले हैं। अब तक 5,34,621 लोग ठीक भी हो चुके हैं। जबकि 22,674 जान गंवा चुके हैं। 1.15 करोड़ से ज्यादा सैंपल की जांच
आईसीएमआर के अनुसार देश में 1.15 करोड़ से ज्यादा जांचें हो चुकी है। प्रयोगशालाओं की संख्या भी 1200 के करीब पहुंच चुकी है। रविवार तक देश की 1194 प्रयोगशाला में सैंपल की जांच हुई है।

12 फीसदी मरीज भारत में
बीते नौ दिनों से भारत में हर रोज 22 हजार से ज्यादा मामले मिल रहे हैं। ऐसे में दुनिया में रोजाना मिल रहे कुल संक्रमितों में 12 फीसदी भारत में हैं। वर्ल्डोमीटर के अनुसार शनिवार को विश्व के कुल 2,14,741 मामलों में भारत में 27,114 (12.60 फीसदी) थे।

ओडिशा में 13 हजार के पार पहुंचे मामले...
ओडिशा में कुल मामले बढ़कर 13,121 हो गए हैं। तीन मरीजों की मौत के बाद मरने वालों की संख्या 64 हो गई है।

बंगाल : एक दिन में रिकॉर्ड 1,560 नए मरीज मिले
पश्चिम बंगाल में चार दिन से तेजी से बढ़ते संक्रमण के बीच रविवार को एक दिन में सबसे ज्यादा 1,560 नए मामले आए। इससे संक्रमितों की संख्या 30 हजार के पार पहुंच गई। 26 लोगों की मौत के साथ मृतकों का आंकड़ा 932 हो गया। रविवार के मामलों में 854 अकेले कोलकाता के हैं। 26 मृतकों में से 13 कोलकाता के हैं। राज्य में 10,500 सक्रिय मामले हैं।

Friday, July 10, 2020

आयुर्वेद बन सकता है कोरोना के खिलाफ रामबाण? अब अमेरिका भी करने जा रहा है क्लीनिकल ट्रायल

बेंगलुरू। पूरी दुनिया में 1 करोड़  22 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित और 5.5 लाख से अधिक लोगों की जान ले चुका खतरनाक नोवल कोरोनावायरस का शर्तिया इलाज के लिए 100 फीसदी इलाज यानी रामबाण की दरकार है, लेकिन एकमात्र वैक्सीन को ही रामबाण मानकर नहीं बैठा जा सकता है।

शायद यही कारण है कि अब आयुर्वेद की ओर अमेरिका ने भी रूचि लेनी शुरू कर दी है।

लॉजिकल बात यह है कि दूसरे दिन से बाजारों में उपलब्ध हो सकने वाली संभावित वैक्सीन को 2020 के अंत तक आने में भी पूरी आशंका है। तो यह जरूरी हो जाता है कि जैसे कोरोना बिना थके अपने काम पर लगा हुआ और उसी तरह इंसान को भी उसके खिलाफ तैयारी अभी से शुरू करनी होगी और आयुर्वेद इसमें मददगार साबित हो सकता है।

यह सर्वविदित सत्य है कि कोरोनावायरस के संक्रमण काफी हद तक रोकने में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि जरूरी है। इसके लिए योग और आयुर्वेद बेहद कारगर उपाय हैं, जिसके जरिएर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया और मजबूत किया जा सकता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में आर्युवेदिक औषधि अश्वगंधा, गिलोय, अतीश, कुड़की और जटामानसी में बेहद उम्दा उपाय है।

हालांकि उपरोक्त सभी आयुर्वेदिक औषधियों में गिलोय पूरे ब्रह्मांड में ऐसी अचूक औषधि है, जिससे शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया और बरकरार रखा जा सकता है। गिलोय का रस रोग प्रतिरोधक क्षमता ही नहीं, बल्कि यह कई दूसरी बीमारियों में रामबाण उपाय है।

गुडुची और अमृता जैसे नामों से भी प्रचलित गिलोय में एंटीऑक्‍सीडेंट्स प्रचुरता में होती है, जिससे फ्री-रेडिकल्‍स से लड़ने में मदद मिलती है और यह कोशिकाओं को स्‍वस्‍थ एवं बीमारियों से दूर रखते हैं।

गौरतलब है कोरोनावायरस के लिए इलाज में ऐसे कई दवाओं को गेमचेंजर की संज्ञा दी गई, लेकिन किसी भी दवा और इलाज से अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। इनमें दावा के साथ इस्तेमाल में लाए गए रेमिडिसीवर और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन जैसी दवाएं और रक्त प्लाज्मा थैरेपी भी गेम से लगभग बाहर हो चुके हैं।

पूरी दुनिया का एकमात्र आसरा वैक्सीन पर टिका है, जिसको बाजार में उपलब्ध होने में 6-12 महीनों को समय लग सकता है। भयावह बात यह है कि 6-12 महीनों में वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगा, इसकी भी गारंटी नहीं है।

निः संदेह दुनिया भर के वैज्ञानिक वैक्सीन के लिए युद्धस्तर पर काम में जुटे हुए हैं और भारत भी इसमें पीछे नहीं है। स्वदेशी कोवाक्सीन वैक्सीन के गत 15 अगस्त को लांच करने की घोषणा की जा चुकी है। वहीं, चीन और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में वैक्सीन निर्माण का काम अंतिम चरण में हैं, लेकिन भारत छोड़ किसी अन्य अभी तक वैक्सीन लांच की समय-सीमा का निर्धारण नहीं किया है

यही कारण है कि इस बीच आयुर्वेद के जरिए कोरोना का इलाज ढूंढने के प्रयास शुरू हो गए हैं। अमेरिका भी आयुर्वेद की शक्ति पर भरोसा जताते हुए आयुर्वेद के क्लिीनिकल ट्रायल करने जा रहा है। हालांकि योगगुरू बाबा रामदेव द्वारा लांच की गई कोरोनिल दवा की लाइसेंसिंग विवादों को किनारे रख दिया जाए, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले औषधियां इम्म्यून सिस्टम को सुरक्षा प्रदान करने में कारगर रहीं हैं, जो कि कोरोना से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।

आयुर्वेद की इन्हीं खूबियों के मद्देनजर जल्द ही भारत और अमेरिका में आयुर्वेदिक चिकित्सक और शोधकर्ता एक साथ मिलकर क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने जा रहे हैं। बुधवार को प्रख्यात भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और डॉक्टरों के एक समूह के साथ वर्चुअल इंटरेक्शन के जरिए अमेरिकी राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने बताया कि दोनों देशों के आयुर्वेदिक चिकित्सक और शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस का आयुर्वेदिक इलाज खोजने के लिए क्लिीनिकल ट्रायल शुरू करने की योजना बनाई है।

उल्लेखनीय है भारतीय दवा कंपनियां सस्ती लागत वाली दवाओं और टीकों के उत्पादन में ग्लोबल लीडर हैं और इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अमेरिका स्थित संस्थानों के साथ भारतीय वैक्सीन कंपनियों के बीच कम से कम तीन सहयोग चल रहे हैं। उक्त सहयोग न केवल भारत और अमेरिका के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि उन अरबों लोगों के लिए भी फायदेमंद होगा, जिन्हें दुनिया भर में कोरोना वायरस के वैक्सीन का इंतजार है।

वैसी भी भारत की शुद्ध देसी चिकित्सा पद्धित आयुर्वेद के बारे में यह मान्यता है कि जहां सारे संभावनाएं खत्म हो जाती है, वहां आयुर्वेद सहारा बनता है, क्योंकि आर्युर्वेद में रोग निवारण क्षमता की असीम संभावनाएं हैं। यही कारण है कि लोग एक बार फिर आयुर्वेद की ओर रूख करना शुरू कर दिया और कोरोना के खिलाफ आयुर्वेद चिकित्सा पद्धित में मौजूद औषधिए खजाना हताशा से भरे चुके दुनिया को नई आशा और नई उम्मीद देगा।

मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वालों पर कम प्रभावी होती है कोरोना

अभी तक के चिकित्सीय और वैज्ञानिक तथ्य इशारा करते हैं कि कोरोनावायरस उन लोगों पर निष्प्रभावी होता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और बाबा रामदेव के दावे के विपरीत अगर कोरोनिल रामबाण नहीं भी है और उसका सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से सहायक होती हैं, तो अधिकांश लोगों को इसकी मदद से बचाया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आयुर्वेदिक होने के कारण कोरोनिल को लेकर कोई जोखिम भी नहीं है।

कोरोनावायरस की प्रकृति और स्वभाव में काफी बदलाव आ चुका है

मौजूदा समय और पिछले तीन महीने पहले के समय की तुलना में कोरोनावायरस की प्रकृति और स्वभाव काफी बदलाव आ चुका है, जिससे वह आसानी से पकड़ में नहीं आ रहा है और अब लगभग सभी राज्यों में कोरोना की टेस्टिंग भी खूब हो रही है, जिससे मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा होता दिख रहा है, लेकिन संक्रमितों के इलाज में देरी, चाहे वह आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्री दवा ही क्यों न हो, जरूरी है।

कोवाक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल में साल भर से अधिक लग सकता है समय

भारत बायोटेक कंपनी वैक्सीन को लेकर भले ही 15 अगस्त तक लॉन्च करने का दावा किया है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रायल में लंबा समय लग सकता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि क्लिीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री पर मौजूद प्रोटोकॉल के अनुसार पहले फेज में कम से कम एक महीना लग सकता है। इसके डाटा को डीजीसीआई के सामने प्रस्तुत करना होता है और फिर अगले चरण की अनुमति मिलती है। पहले और दूसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल में सवा साल यानी एक साल तीन महीने भी लग सकते हैं।

वर्तमान में भारत में रोजाना 22000-24000 नए मामले सामने आ रहे हैं

वर्तमान में भारत में रोजाना 22000-24000 नए मामले सामने आ रहे हैं और प्रति दिन यानी 24 घंटे में संक्रमण से मरने वालों की संख्या 300-400 हो गई है। बुधवार को कोविड-19 के 22,752 नए मामले सामने आने के बाद कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 7,42,417 हो गई है। वहीं, संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने की दर भी बढ़कर 61.53 फीसदी हो गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में देश में संक्रमण से 482 और लोगों की मौत के साथ ही मृतकों की संख्या भारत मे बढ़कर 20,642 हो गई है।

विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने बढ़ती भयावहता को लेकर चिंता जाहिर की है

चेतावनी जारी करते हुए WHO कहा है कि कोरोनावायरस ज्‍यादा खतरनाक फेज में पहुंच चुका है। डायरेक्‍टर टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस कहते हैं, हम नए और बेहद खतरनाक चरण में पहुंच चुके हैं। वर्ष 1918 में फैले स्‍पेनिश फ्लू से करते हुए कहा कि स्‍पेनिश फ्लू भी एक के बाद एक तीन बार लौटी थी। टेड्रोस ने आगे कहा कि जैसे ही लोग असावधान होंगे, कोरोना का कहर और तेजी से बढ़ेगा।

WHO ने माना कि अब हवा में ही फैल रहा कोरोना?

32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को लिखे एक पत्र में बताया था कि कोरोना एक एयरबॉर्न वायरस है, जो हवा में भी फैल सकता है। वैज्ञानिकों ने कुछ साक्ष्यों पर भी प्रकाश डाला है, जो बताते हैं कि वायरस के नन्हे पार्टिकल्स हवा में रहकर लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। WHO ने भी तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। WHO में कोविड-19 महामारी से जुड़ी टेक्निकल लीड डॉक्टर मारिया वा करखोव ने कहा कि भीड़-भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों और बंद जगहों पर हवा के जरिए वायरस के फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

अधिकाधिक टेस्टिंग भारत में नए मामलों की संख्या बढ़ी है

Covid-19 के नए केसेज के पीछे भारत की बढ़ी हुई टेस्टिंग क्षमता कही जा रही है। वर्तमान में भारत में हर दिन ढाई लाख से अधिक लोगों की टेस्टिंग हो रही है। प्रति दिन भारत रोजाना किए जा रहे टेस्‍ट्स की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ है और अब यह संख्‍या प्रतिदिन के हिसाब से हो रही टेस्टिंग एक लाख के पार हो गई है। कहा जाता है कि कांटेक्ट ट्रेसिंग को रोकने और संक्रमण को रोकने के लिए ज्‍यादा टेस्टिंग जरूरी है। यह कई देशों द्वारा किए गए नतीजों से साबित भी हो चुका है कि टेस्टिंग बढ़ने से केसेज अधिक संख्या में सामने आएंगे।

टेस्टिंग में वृद्धि के जरिए कई देशों ने कोरोना निंयत्रण पाने में सफलता पाई

टेस्टिंग में वृद्धि के जरिए कई देशों ने वर्तमान में कोरोनावायरस पर निंयत्रण पाने में सफलता पाई है। इनमें एशियाई देश चीन, जापान और दक्षिण कोरिया और दक्षिण एशियाई देश सिंगापुर शामिल हैं, जहां टेस्टिंग ही वह प्रमुख टूल था, जिसके जरिए कोरोना के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कमोबेश यही फार्मूला यूरोपीय देशों और अमेरिका में भी अमल में लाकर काफी हद तक कोरोना को कंट्रोल किया हुआ है।

क्या भारत कम्युनिटी ट्रांसमिशन की ओर बढ़ सकता है?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्ष वर्धन ने फिलहाल भारत में कम्यूनिटी ट्रांसमिशन से इनकार किया है, लेकिन हमारी यह जिम्मेदारी है कि अगर संपर्क में आया कोई व्यक्ति अगर कोरोना संक्रमति अथवा संदिग्ध लगता है, तो उसके बारें स्थानीय प्रशासन को सूचित जरूर करें। इससे न केवल अमुक व्यक्ति बल्कि उसका परिवार और आस-पड़ोस में संक्रमण को फैलने से बचाया जा सकता है। प्रशासन और सरकारें उसकी पहचान आसानी से कर सकेंगे और कांटैक्ट ट्रैंसिंग के जरिए उसके संपर्क में आए लोगों का भी नमूना लेकर कम्युनिटी ट्रांसमिशन को रोकने में कामयाब हो सकते हैं।


Thursday, July 9, 2020

शाम पांच बजे से पूरी तरह पूर्णबंदी लागू करने का फैसला किया है। पूर्णबंदी को एक सप्ताह तक लागू किया जाएगा


पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण और इससे होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ममता सरकार ने कंटेनमेंट एवं बफर जोनों में गुरुवार शाम पांच बजे से पूरी तरह पूर्णबंदी लागू करने का फैसला किया है। पूर्णबंदी को एक सप्ताह तक लागू किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है। कोलकाता शहर में 33 कंटेनमेंट जोन हैं।

इनमें उल्टाडांगा, फूलबगान, कांकुरगाछी, हुडको, बेलियाघाट, भवानीपुर, अलीपुर, विजयगढ़, जादवपुर, न्यू अलीपुर, कस्बा, मुकुंदपुर और अजयनगर शामिल हैं। उत्तरी 24 परगना जिले में विधाननगर नगर निगम के तहत राजारहाट, स्वरूपनगर और हस्नाबाद,वनगांव, दमदम, हाबरा, हलीशहर, बैरकपुर, बर्सात और बशीरहाट समेत कुल 219 कंटेनमेंट जोन हैं।

इसके अलावा दक्षिण 24 परगना जिले में 155 कंटेनमेंट जोन हैं। राज्य सरकार ने कोरोना प्रसार को रोकने के लिए कानून लागू करने वाली सभी एजेंसियों को लॉकडाउन कंटेनमेंट नीतियों तथा दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

कोलकाता, हावड़ा तथा उत्तरी 24 परगना और अन्य प्रभावित जिलों में आज शाम पांच बजे से लागू हो जाएगा। राज्य के गृह सचिव ए बंदोपाध्याय ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों तथा नगर निगमों को संपूर्ण लाकडाउन का पालन कराने का निर्देश दिया। इस दौरान इन क्षेत्रों में जरूरी सेवाओं को छोड़कर सभी प्रकार की गतिविधियां बंद रहेगी। सरकारी और प्राइवेट सभी ऑफिस, शॉपिंग मॉल, बाजार, दुकानें, औद्योगिक इकाइयां आदि सम्पूर्ण रूप से बन्द रहेंगे। परिवहन सेवा भी पूरी तरह बन्द रहेगी। सिर्फ अत्यावश्यक दुकानें खुलेंगी, बाकी सभी दुकान और बाजार भी बंद रहेंगे।

राज्य सरकार ने सभी कंटेनमेंट जोन में पुलिस प्रशासन को सख्ती से लॉकडाउन का पालन कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ राज्य सरकार ने कंटेनमेंट जोन की अपनी परिभाषा में भी बदलाव किया है। कंटेनमेंट जोन को पहले तीन भागों में विभाजित किया गया था जिसमें अफेक्टेड जोन, बफर जोन व क्लीन जोन था। अब इसे मिलाकर सिर्फ कंटेनमेंट जोन कर दिया गया है। सभी कंटेनमेंट जोन में गैर जरूरी गतिविधियों की नौ जुलाई से इजाजत नहीं होगी। दरअसल ये सभी कंटेनमेंट जोन राज्य के 10 जिलों में हैं, जिसमें कोलकाता, हावड़ा, उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना, हुगली, मालदा, उत्तर दक्षिण दिनाजपुर, अलीपुरद्वार आदि शामिल है। गौरतलब है कि बंगाल में 986 नये मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बुधवार को 24823 पहुंच गयी तथा मृतकों की संख्या 827 हो गयी।

देश के 8 राज्यों में कोरोना के 90 प्रतिशत सक्रिय मामले, मंत्रियों के समूह ने दी जानकारी

नई दिल्ली, पीटीआई। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, कर्नाटक और तेलंगाना सहित आठ राज्यों में, देश में सक्रिय कोरोना वायरस (COVID-19) मामलों में लगभग 90 प्रतिशत और 49 जिलों से 80 प्रतिशत सक्रिय मामले सामने आए हैं। इसकी जानकारी मंत्रियों का समूह (GoM) ने गुरुवार को कोरोना वायरस (COVID-19) पर सूचित किया।

इसके अलावा, GoM को बताया गया था कि छह राज्यों- महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस (COVID-19) और 32 जिलों में हुई मौतों का 86 प्रतिशत है और 80 प्रतिशत मौतों का हिस्सा जिलों में है।

मंत्रालय ने कहा कि GoM ने गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की अध्यक्षता में अपनी 18 वीं बैठक की, जिसमें बताया गया कि उच्च COVID-19 घातक दर दिखाने वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया था


Wednesday, July 8, 2020

कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं वहीं इससे ठीक होने वालों की संख्या


देश में जहां कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं वहीं इससे ठीक होने वालों की संख्या भी तेजीे बढ़ रही है।

इंडिया टीवी न्यूज़ डॉट इन पर छपी खबर के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे यानि बुधवार सुबह 8 बजे से गुरुवार सुबह 8 बजे के दौरान देशभर में कोरोना वायरस के 24879 नए केस आए हैं और देश में अब कुल कोरोना वायरस मामलों का आंकड़ा बढ़कर 767295 तक पहुंच गया है। हालांकि इसमें 269789 ही एक्टिव केस हैं और ज्यादातर लोग ठीक हो चुके हैं।

कोरोना वायरस के नए केस सामने आने के साथ देश में कोरोना की वजह से जान गंवाने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक मंगलवार सुबह 8 बजे से लेकर बुधवार सुबह 8 बजे तक देशभर में कोरोना वायरस की वजह से 487 मौतें दर्ज की गई हैं और अबतक यह वायरस देशभर में कुल 21129 लोगों की जान ले चुका है।

हालांकि भारत में कोरोना वायरस समक्रमण बढ़ने के साथ कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है और अबतक देशभर में कुल 476377 लोग ठीक हो चुके हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान देशभर में 19547 लोग कोरोना से ठीक हुए हैं। देश में कोरोना वायरस का रिकवरी रेट 61 प्रतिशत के ऊपर बना हुआ है।

कोरोना वायरस के मरीजों की पहचान के लिए देश में लगातार टेस्टिंग हो रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार 8 जुलाई(कल) तक कोरोना वायरस के लिए कुल 1,07,40,832 सैंपल का टेस्ट किया गया।

इनमें से 2,67,061 सैंपल का टेस्ट कल किया गया। दुनियाभर में अमेरिका, रूस और ब्रिटेन के बाद कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा टेस्ट भारत में ही हो रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस के मामलों की बात करें तो दुनियाभर में कुल मामलों का आंकड़ा बढ़कर 1.21 करोड़ के पार पहुंच गया है, अबतक दुनियाभर में कोरोना वायरस की वजह से 5.52 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

हालांकि पूरी दुनिया में 70.30 लाख से ज्यादा कोरोना वायरस से ठीक भी हो चुके हैं।

दुनियाभर में कोरोना वायरस के सबसे अधिक मामले अमेरिका में हैं जहां पर 31.58 लाख से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं और 1.34 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, इसके बाद ब्राजील में 17.16 लाख से ज्यादा केस सामने आए हैं और 68 हजार से ज्यादा की जान गई है। रूस में भी 7 लाख केस सामने आ चुके है

Monday, July 6, 2020

डब्ल्यूएचओ ने कहा, हवा से कोरोना संक्रमण के फैलने की रिपोर्ट की कर रहे हैं समीक्षा


जेनेवा, रायटर। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' में प्रकाशित उस लेख के संदर्भों की समीक्षा कर रहा है, जिसमें विज्ञानियों ने उससे कोरोना वायरस पर दिशा-निर्देशों में बदलाव करने को कहा है। मालूम हो कि रिपोर्ट में वैज्ञानिकों के हवाले से कहा गया है कि कोरोना वायरस हवा से भी फैलता है। डब्ल्यूएचओ (World Health Organization, WHO) के प्रवक्ता तारिक जसरेविक ने कहा कि अखबार में प्रकाशित लेख के संदर्भों की तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर समीक्षा की जा रही है।

उल्‍लेखनीय है कि 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ को एक खुला पत्र लिखा है जिसमें वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोरोना वायरस के छोटे-छोटे कण हवा में रहकर लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ से उसके दिशा-निर्देशों में संशोधन करने की अपील की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस एयरबोर्न यानी हवा के जरिए भी फैलता है। अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने उक्‍त जानकारी अपनी रिपोर्ट में दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बचाव के लिए चारदीवारियों में बंद रहते हुए भी एन-95 मास्क पहने रहने की जरूरत है।

हालांकि वैज्ञानिकों के पत्र पर डब्ल्यूएचओ ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कोरोना वायरस प्रमुख रूप से संक्रमित व्यक्ति के छींकने और खांसने से निकलने वाली छोटी-छोटी बूंदों से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, बोलने या हंसने से ये बूंदे निकलती हैं और तुरंत सतह पर बैठ जाती हैं। यही कारण है कि डब्ल्यूएचओ शुरुआती रोकथाम को लेकर बार बार हाथ धोते रहने की सिफारिश कर रहा है क्योंकि हमारे हाथ ऐसी संक्रमित सतहों के संपर्क में आ सकते हैं।

वहीं समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपात संबंधी स्थितियों के प्रमुख ने कहा है कि हमें कोरोना संक्रमण के मौजूदा दौर से लड़ने की जरूरत है न कि इस पर ध्यान देने की कि इस संक्रमण का दूसरा दौर कब आएगा। डब्ल्यूएचओ ने जानलेवा कोरोना विषाणु से लड़ने में अहम रणनीतियों के तौर पर मास्क पहनने, सामाजिक दूरी का पालन करने और साफ-सफाई रखने के साथ ही संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने पर जोर दे रहा है। डब्ल्यूएचओ का यह भी कहना है कि सरकारों को अपने देशों में बीमारी की स्थिति के हिसाब से नीतियां बनानी चाहिए।

Thursday, July 2, 2020

सरकार ने होम आइसोलेशन के लिए जारी की नई गाइडलाइन


नई दिल्‍ली, एएनआइ। सरकार ने कोरोना के बहुत हल्‍के यानी माइल्‍ड, प्रीसिम्‍टोमेटिक और एसिम्‍टोमेटिक मामलों के संदर्भ में होम आइसोलेशन के लिए संशोधित गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन में केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने कहा है कि उन्‍हीं मरीजों को होम आइसोलेशन में भेजा जाएगा जिन्‍हें डॉक्‍टरों ने अस्‍पताल में भर्ती नहीं होने की जरूरत बताई है। जारी नई गाइडलाइन के मुताबिक, हल्के लक्षण या बगैर लक्षण वाले मरीज जिनको कोई दूसरी बीमारी नहीं है वो घर पर होम आइसोलेशन में रहते हुए अपना इलाज करा सकेंगे लेकिन इसके लिए पहले डॉक्टर की परमि‍शन लेनी जरूरी होगी।

गाइडलाइन में कहा गया है कि यदि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज को सांस लेने में दिक्‍कत महसूस होती है।

सीने में दर्द शुरू होता है या बोलने में तकलीफ होती है तो उनको तुरंत अस्पताल में आना होगा। यही नहीं 60 साल के ऊपर के मरीजों को अस्पताल में ही अपना इलाज कराना होगा। यही नहीं जिन्हें डायबिटीज, हाईपर टेंशन, कैंसर, किडनी, फेफड़ों से संबंधित गंभीर बीमारी है उनको भी अस्‍पताल में ही इलाज कराना होगा... सरकार ने साफ कहा है कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को परिवार के सदस्‍यों से बिल्‍कुल ही अलग थलग रहना होगा...

जारी गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज की देखभाल के लिए 24 घंटे एक केयर गिवर होगा। केयर गिवर मरीज के स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में अस्‍पताल और मरीज के बीच सेतु का काम करेगा। केयर गिवर को चिकित्‍सक के परामर्श के आधार पर तय प्रोटोकॉल के तहत हाइड्रोक्‍सी क्‍लोरोक्‍वीन की खुराक लेनी चाहिए। होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज के मोबाइल में आरोग्‍यसेतु ऐप डाउनलोड होना चाहिए। यही नहीं होम आइसोलेशन के दौरान इसे पूरी तरह सक्रिय होना चाहिए। नए दिशा निर्देशों में कहा गया है कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों में लक्षण दिखने के 10 दिनों के बाद और तीन दिन तक बुखार नहीं आने पर ही उनकी अवधि खत्‍म मानी जाएगी।

उल्‍लेखनीय है कि भारत में एक दिन में कोरोना के 19,148 नए मामले सामने आए हैं जबकि 434 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही संक्रमितों की संख्या 6,04,641 हो गई है जबकि 17,834 लोग अबतक इस महामारी से जान गवां चुके हैं। अभी पांच दिन पहले ही संक्रमितों की संख्या पांच लाख के पार पहुंची थी। हालांकि बीमारी से रिकवर होने वालों की संख्‍या में भी इजाफा हुआ है। कोरोना से उबरने वाले लोगों की संख्या 3,59,859 हो गई है। देश में मौजूदा वक्‍त में 2,26,947 लोगों का इलाज चल रहा है। अभी तक करीब 59.52 फीसद मरीज स्वस्थ हुए हैं।

हिमाचल प्रदेश में वीरवार को आईटीबीपी के 23 जवानों सहित कोरोना के 35 नए मामले सामने आए

शिमला: हिमाचल प्रदेश में वीरवार को आईटीबीपी के 23 जवानों सहित कोरोना के 35 नए मामले सामने आए हैं। बता दें कि वीरवार को हिमाचल के किन्नौर जिला में आईटीबीपी के 17, शिमला में आईटीबीपी के 6 जवान कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके अलावा हमीरपुर और ऊना में 3-3, कांगड़ा में 2 तथा सिरमौर, लाहौल-स्पीति, बिलासपुर और मंडी में 1-1 मामला कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। वहीं आज प्रदेश में 15 लोग ठीक भी हुए हैं। इनमें हमीरपुर और ऊना में 5-5, सोलन में 3 तथा कांगड़ा और शिमला 1-1 मरीज ठीक हुआ है। प्रदेश में अब कोरोना के कुल मामलों का आंकड़ा 1014 पहुंच गया है जबकि एक्टिव केस 359 हो गए हैं। हिमाचल में अब तक 8 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है जबकि अब तक 632 लोग ठीक हो चुके हैं।

किन्नौर और शिमला में आईटीबीपी के 23 जवान कोरोना पॉजिटिव

वीरवार को किन्नौर और शिमला जिला में आईटीबीपी के 23 जवान कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें से किन्नौर के जंगी में क्वारंटाइन 17 जवान जबकि 6 जवान ज्यूरी रामपुर शिमला में कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उक्त 6 जवान ज्यूरी में संस्थागत क्वारंटाइन थे। किनौर में अब कुल मामलों की संख्या 30 और एक्टिव केस 27 हैं। वहीं शिमला में कुल मामले 47 और एक्टिव केस 21 हैं।

हमीरपुर में 3, कांगड़ा में 2 पॉजिटिव

हमीरपुर में आए कोरोना के तीन नए मामलों में टौणीदेवी ब्लॉक के तहत कोट गांव का 78 वर्षीय बुजुर्ग 23 जून को लुधियाना से लौटा है और गृह संगरोध में था। वहीं बड़सर ब्लॉक से संबंधित 48 वर्षीय महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई है जोकि 25 जून को अपनी गाड़ी में पति और बच्चे के साथ दिल्ली से लौटी है और मैहरे स्थित विश्रामगृह में संगरोध में थी। इसके अलावा भरनाग कोट 58 वर्षीय व्यक्ति उपमंडल सुजानपुर में एक कोरोना संक्रमित अपने रिश्तेदार के संपर्क में आने से पॉजिटिव हुआ है। हमीरपुर में अब कोरोना के कुल मामले 235 और एक्टिव केस 85 हो गए हैं। कांगड़ा जिला में ठाकुरद्वारा के घमाला गांव की 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने से संक्रमित हो गई है। वहीं किर्गिस्तान से लौटी देहरा की 22 वर्षीय युवती कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। दोनों को डाढ कोविड सैंटर में शिफ्ट कर दिया है। कांगड़ा में अब कुल मामले 280 और एक्टिव केस 108 हैं।

बिलासपुर में एक, ऊना में 3 कोरोना पॉजिटिव

वहीं बिलासपुर जिला में गुरुग्राम से लौटा चांदपुर गांव का 28 वर्षीय युवक कोरोना संक्रमित पाया गया है। उक्त युवक बिलासपुर के लेक व्यू होटल में संस्थागत क्वारंटाइन था। बिलासपुर में अब कुल मामले 47 और एक्टिव केस 19 हैं। इसी तरह ऊना में वीरवार को 3 मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के रामपुर से लौटा उपमंडल संतोषगढ़ का 24 वर्षीय युवक पॉजिटिव पाया गया है जोकि होम क्वारंटाइन था। वहीं दिल्ली से लौटा उपमंडल गगरेट के टटेहड़ा का 31 वर्षीय व्यक्ति और अमृतसर से लौटागगरेट उपमंडल के गोंदपुर बनेहड़ा का 22 वर्षीय युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। ऊना में अब कुल पॉजिटिव मामलों की 113 और एक्टिव केस 23 हैं।

सिरमौर और लाहौल-स्पीति में 2 कोरोना पॉजिटिव

सिरमौर जिला में कुछ दिन पहले दिल्ली से लौटा कंडइवाला का सेना का जवान कोरोना पॉजिटिव पाया गया है जोकि होम क्वारंटाइन था। सिरमौर में अब कुल मामले 40 और एक्टिव केस10 हैं। वहीं लाहौल-स्पीति में 16 जून को दिल्ली से केलांग पहुंचा 22 वर्षीय झारखंड का युवक पॉजिटिव पाया गया है। केलांग में यह प्राइवेट कंपनी में काम करता है। लाहौल-स्पीति में अब 4 मामले हैं और चारों एक्टिव हैं।

मंडी में दुबई से लौटा युवक कोरोना पॉजिटिव

मंडी जिला के जोगिंद्रनगर उपमंडल में ब्यूहं गांव का 31 वर्षीय युवक कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। उक्त युवक 2 जून को दुबई से चंडीगढ़ पहुंचा था तथा चंडीगढ़ से प्रशासन द्वारा चलाई गई बसों के माध्यम से मंडी पहुंचने पर 3 जून से मंडी के एक होटल में 10 दिनों तक संस्थागत क्वारंटाइन में था तथा 10 दिनों के बाद रिपोर्ट नैगेटिव आने के बाद उसे 14 दिन घर में क्वारंटाइन किया गया था। तबीयत खराब होने पर उसका पुन: सैंपल लिया गया था, जिसमें यह कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इसके अलावा मंडी जिल का यूके में मरीन इंजीनियर कोरोना पॉजिटिव निकला है। बल्ह निवासी उक्त युवक भाई की बीमारी के चलते दिल्ली गया था और मंडी पहुंचते ही उसकी पॉजिटिव होने की सूचना आई है। मंडी में अब कोरोना के कुल मामले 33 और एक्टिव केस 9 हैं।


दुनिया के कई देश कोरोना की वैक्सीन विकसित करने के काम पर जुटे हैं


कोरोना संकट से जूझ रही दुनिया को अभी तक इसकी एक कामयाब वैक्सीन की तलाश है। दुनिया के कई देश कोरोना की वैक्सीन विकसित करने के काम पर जुटे हैं। वहीं दूसरी ओर कोरेाना से संक्रमित लोगों को ठीक करने के लिए वैज्ञानिक कुछ पुरानी दवाओं और फार्मूलों पर रिसर्च कर रहे हैं। इस बीच मात्र 1.5 रुपए की गोली के चमत्कारिक असर से दुनिया भर के डॉक्टर आश्चर्यचकित हैं। यह सस्ती दवा मेटफॉर्मिन है, इस दवा का इस्तेमाल आम तौर पर डायबिटीज के रोगियों को ठीक करने के लिए किया जा जाता है। यह दवा अब कोरोना के मरीजों पर भी इस्तेमाल की जा रही है। जिसके सुखद परिणाम सामने आए हैं।

मेटफॉर्मिन को लेकर चीन के वुहान के डॉक्टरों ने रिसर्च की है।

कुछ केस स्टडी के आधार पर डॉक्टरों का कहना है कि यह दवा कोरोना के इलाज में कारगर पाई गई है। वहीं, अमेरिका के मिन्नेसोटा यूनिवर्सिटी ने करीब 6 हजार मरीजों पर मेटफॉर्मिन को आजमाया। मिन्नेसोटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का भी कहना है कि मेटफॉर्मिन दवा कोरोना मरीजों की मौत के खतरे को कम कर सकती है।

अंग्रेजी अखबरा द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की प्रमुख स्वास्थ्य संस्था नेशनल हेल्थ सर्विस पहले से इस दवा का इस्तेमाल कर रही है। यह दवा डायबीटिज के साथ-साथ ब्रेस्ट कैंसर और हार्ट की बीमारियों में भी कारगर पाई गई है। टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए 1950 के दशक से ही इस दवा का उपयोग किया जा रहा है।

कोरोना वायरस की जन्मभूमि कहे जाने वाले वुहान में मेटफॉर्मिन दवा काफी कारगर साबित हुई है। स्टडी में पाया गया है कि डायबिटीज से पीड़ित जो लोग कोरोना संक्रमित हुए और यह दवा ले रहे थे उनमें मौत की दर, यह दवा नहीं लेने वाले डायबिटीज के मरीजों की तुलना में कम थी। स्टडी के दौरान वुहान के डॉक्टरों को पता चला कि मेटफॉर्मिन लेने वाले सिर्फ 3 मरीजों की मौत हुई थी, जबकि इतने ही गंभीर 22 कोरोना मरीजों की मौत हो गई जिन्होंने ये दवा नहीं ली थी। डॉक्टरों ने कोरोना से गंभीर रूप से बीमार पड़े 104 मरीजों के डाटा की स्टडी की जिन्होंने मेटफॉर्मिन दवा ली थी। इन मरीजों के डेटा की तुलना कोरोना के 179 अन्य गंभीर मरीजों से की गई।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ने दावा किया है कि कोरोना की दवा की जरूरत सभी लोगों को नहीं होगी।

दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ने दावा किया है कि कोरोना की दवा की जरूरत सभी लोगों को नहीं होगी। कोरोना वायरस के चलते अब तक एक करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सुनेत्रा गुप्ता कोरोना पर लगाम लगाने के लिए लागू किए जाने वाले लॉकडाउन के पक्ष में नहीं हैं। इस वजह से उनका नाम 'प्रोफेसर रिओपन' तक रख दिया गया। हमारे सहयोगी अंग्रेजी अखबार 'हिन्दुस्तान टाइम्स' के साथ बात करते हुए प्रोफेसर गुप्ता ने बताया कि अधिकांश लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की आवश्यकता क्यों नहीं है और कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन एक दीर्घकालिक समाधान नहीं है।

प्रोफेसर ने कहा, 'अब तक हमने देखा है कि सेहतमंद लोग जोकि बुजुर्ग नहीं है और बीमारी नहीं है, उन्हें इस वायरस से ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उनके लिए यह सिर्फ अन्य बुखार जैसा ही है।' उन्होंने कहा कि जब तक टीका/वैक्सीन अस्तित्व में आएगा, तब इसका इस्तेमाल जरूरतमंदों पर होगा। हममें से ज्यादातर लोगों को कोरोना वायरस के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है।

प्रोफेसर गुप्ता ने आगे कहा कि उन्हें लगता है कि कोरोना वायरस महामारी प्राकृतिक तरीके से खत्म हो जाएगी और हमारे जीवन का इंफ्लुएंजा की तरह हिस्सा बनी रहेगी। उन्होंने कहा, 'उम्मीद है कि इन्फ्लूएंजा की तुलना में कम मौत हो सकती है। मुझे लगता है कि कोरोना वायरस के लिए एक टीका बनाना काफी आसान है।'

लंबे समय तक नहीं लागू किया जा सकता लॉकडाउन

प्रोफेसर गुप्ता ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लॉकडाउन को एक बेहतर उपाय जरूर बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि इसे लंबे समय तक के लिए लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, 'लॉकडाउन वायरस को दूर रखने के लिए एक समझदार उपाय है, लेकिन बिना दवा के ज्यादा समय तक इसको दूर नहीं रखा जा सकता है।'

दुनिया में एक करोड़ से ज्यादा संक्रमित

दुनियाभर में कोरोना वायरस के चलते एक करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, 10,861,070 लोग कोरोना से बीमार हो चुके हैं, जबकि अब तक 520,177 लोगों की मौत हुई है। वहीं, भारत में भी गुरुवार को कोरोना वायरस से संक्रमित कुल मरीजों का आंकड़ा छह लाख के पार पहुंच चुका है।

Monday, June 29, 2020

Covid19 मरीज ने मरने से पहले किया वीडियो वायरल, कहा- अस्पताल ने हटाया वेंटिलेटर, मैं मर रहा हूं पिताजी, सांस लेने में हो रही है दिक्कत..



Hyderabad covid death, hyderabad hospital, pulled covid 19 patient ventilator, covid 19 patient said- im dying father, video viral : हैदराबाद के एक अस्पताल का वीडियो वायरल हो रहा है. बताया जा रहा है कि यह वीडियो उसी अस्पताल में भर्ती एक कोरोना मरीज के मौत से पहले का है. दरअसल, 24 जून को हैदराबाद के सिटी अस्पताल में एक 35 वर्षीय मरीज को भर्ती किया गया था जिसकी मौत 26 जून को हो गई.

मौत से पहले संक्रमित व्यक्ति ने जो वीडियो वायरल किया वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है. वीडियो में मरीज अस्पताल प्रबंधन की पोल खोलते दिख रहा है. वायरल वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि कोरोना संक्रमित मरीज सांस लेने में दिक्कतें महसूस कर रहा है. मरीज के अनुसार अस्पताल कर्मचारियों ने तीन घंटे से वेंटिलेटर हटा दिया है और बार-बार बोलने पर भी ऑक्सीजन सर्पोट नहीं दे रहे हैं. मरीज वीडियो में कहते नजर आ रहा है कि मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं पिताजी, बॉय पिताजी, सभी को बॉय-बॉय.

दिल दहला देने वाले इस वीडियो के बाद परिजनों ने काफी हंगामा किया और अस्पताल प्रबंधन पर बेटे की मौत का आरोप लगाए. हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि मरीज को ऑक्सीजन सर्पोट में ही रखा गया था. लेकिन, हृदय संबंधी रोग होने के कारण उनकी मौत हुई है.

आपको बता दें कि दो दिन में हैदराबाद से ऐसा दो मामला सामने आ चुका है जो अमानवीयता दर्शाता है. एक मामले में हैदराबाद नगर निगम के कर्मचारी भी मिट्टी खुदाई करने वाले जेसीबी में संदिग्ध कोरोना संक्रमित के शव को डाल कर श्मशान घाट ले जाते दिखे थे. इस मामले में भी वीडियो वायरल और विपक्ष द्वारा उठाए सवाल के बाद दो अधिकारियों को सस्पेंड किया गया था.

इधर, अस्पताल में कोरोना मरीज के मौत के मामले ने भी तूल पकड़ लिया है. मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि वीडियो भेजने के थोड़ी देर बाद ही उनके बेटे की मौत हो गई. जिसके बाद रविवार को मृतक का अंतिम संस्कार किया गया. आपको बता दें मृतक हैदराबाद के जवाहरनगर का रहने वाला था. पिता की मानें तो उनके बेटे को 24 जून से तेज बुखार था. जिसके बाद उन्हें चेस्ट अस्पताल में भर्ती किया गया था.

Sunday, June 28, 2020

गुरदासपुर की संक्रमित महिला की अमृतसर में मौत, पठानकोट में सेना के जवान समेत सात पॉजिटिव


 
कोरोना वायरस।
पठानकोट में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। शनिवार देर रात और रविवार को अमृतसर से 185 लोगों की रिपोर्ट पठानकोट पहुंची। इनमें से 7 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 178 लोग निगेटिव आए हैं। रविवार को संक्रमित मिले मरीजों में सेना का एक जवान भी शामिल है। वह दिल्ली से पठानकोट एयरपोर्ट पर आए थे। यहीं उनका सैंपल लिया गया था। 
वहीं, पठानकोट में कार्यरत संक्रमित हेल्थ इंस्पेक्टर की बटाला निवासी पत्नी, 10 साल की बेटी और एक अन्य महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके अलावा, अबरोल नगर पठानकोट के रहने वाले 71 वर्षीय बुजुर्ग को मोहाली उपचार के लिए ले जाया गया था। उपचार से पहले डॉक्टरों ने उक्त व्यक्ति का कोरोना टेस्ट किया। शनिवार देर रात उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। वहीं पठानकोट के डलहौजी रोड स्थित मोहल्ला कांशीनगर का 64 वर्षीय व्यक्ति और पहले से संक्रमित आनंदपुर निवासी बुजुर्ग के संपर्क में आया युवक भी संक्रमित मिला है।
 
जालंधर: पांच कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मिली छुट्टी
सरकारी मेरिटोरियस स्कूल में बने कोविड केयर सेंटर से रविवार को पांच कोरोना पॉजिटिव मरीजों को छुट्टी दे दी गई। इनका इलाज सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. जगदीश कुमार की टीम द्वारा किया जा रहा था। इन मरीजों को स्वास्थ्य विभाग के नए प्रोटोकॉल के अनुसार छुट्टी दी गई है। जिसके अनुसार मरीज में वायरस के लक्षण शुरू होने के 10 दिनों बाद ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती और उनको पिछले तीन दिनों से बुखार नहीं हुआ तो उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी। 
फिरोजपुर: तीन कोरोना पॉजिटिव मिले

फिरोजपुर में रविवार को तीन पॉजिटिव मरीज मिले। इनमें से दो तलवंडी भाई और एक फिरोजपुर शहर के जंडी मोहल्ले का रहने वाला है। अब फिरोजपुर में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 40 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक तलवंडी भाई निवासी विजय कुमार पॉजिटिव था। विजय के ही परिवार के एक सदस्य की रविवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसका 25 जून को सैंपल लिया गया था। 
गुरदासपुर की संक्रमित महिला की अमृतसर में मौत 
गुरदासपुर की संक्रमित बुजुर्ग महिला की देर रात अमृतसर में मौत हो गई। मृतका बहादुर हुसैन खुर्द, बाला मसानिया तहसील बटाला की रहने वाली थी। महिला जीएमसी अस्पताल अमृतसर में दाखिल थी। सिविल सर्जन किशन चंद ने बताया कि महिला को दिल की बीमारी थी और उसकी किडनी भी खराब थी। महिला के फेफड़े में पानी भरा हुआ है और शुगर की मरीज थी। इलाज के लिए वह अमृतसर दाखिल थी, जहां उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। 
होशियारपुर में तीन नए पॉजिटिव
होशियारपुर में तीन नए पॉजिटिव केस आने के बाद कोरोना से प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़कर 177 हो गई है। सिविल सर्जन डा. जसवीर सिंह ने बताया कि सेहत केंद्र बुडाबड़ के अधीन एक गांव निवासी 30 वर्षीय व्यक्ति संक्रमित मिला है। दूसरे मामले में 40 वर्षीय महिला जो कि सेहत केंद्र हाजीपुर के अधीन गांव दलवाली कला की है। तीसरा केस होशियारपुर के मोहल्ला विजय नगर से संबधित है जो पानीपत से आया था। डॉ. जसवीर सिंह ने बताया कि रविवार को फ्लू जैसे संदिग्ध लक्षणों वाले व्यक्तियों के 129 नए सैंपल लिए गए है। 420 सैपलों की लैब से प्राप्त रिपोर्ट में 3 केस पॉजिटिव मिले।  
फतेहगढ़ साहिब: गर्भवती समेत तीन नए केस
फतेहगढ़ साहिब में रविवार को तीन लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। तीन में से दो लोग पीजीआई और सेक्टर- 32 अस्पताल चंडीगढ़ में काम करते हैं। इसके अलावा अमलोह के वार्ड नंबर-4 की एक गर्भवती महिला भी पॉजिटिव आई है। सिविल सर्जन डॉ. नरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि गांव पोला का व्यक्ति चंडीगढ़ पीजीआई में काम करता है। उसका वहीं सैंपल लिया गया। इसके अलावा दूसरा व्यक्ति गांव जख्वाली निवासी भी चंडीगढ़ के सेक्टर 32 सरकारी अस्पताल में काम करता है। इसका भी सैंपल वहीं लिया गया था, जो पॉजिटिव आया है। खन्ना अमलोह रोड निवासी गर्भवती महिला ने खन्ना के सरकारी अस्पताल में टेस्ट करवाया था। वह भी कोरोना पीड़ित पाई गई है।

दिल्ली कैंट से लौटा सेना का जवान कोरोना पॉजिटिव



नाहन/ पांवटा साहिब (सिरमौर)। जनपद सिरमौर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में दिल्ली के कैंट एरिया से लौटा धौलाकुआं इलाके का एक भारतीय सेना का जवान कोरोना संक्रमित पाया गया है। हालांकि, यहां पहुंचते ही उसे संस्थागत क्वारंटीन किया गया था। लिहाजा, चिंता की बात नहीं है।
क्वारंटीन सेंटर में परिवार के लोग मुलाकात करने गए थे या नहीं, इसका पता लगाया जा रहा है। कोरोना संक्रमित सेना के जवान को त्रिलोकपुर में बनाए गए कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया है। जिला सिरमौर में अब कोरोना संक्रमण के एक्टिव मामलों की संख्या 14 हो गई है।
सिरमौर जिले में एक दिन की राहत के बाद फिर कोरोना संक्रमण ने दस्तक दे दी है। सिरमौर के धौलाकुआं में कोरोना संक्रमण का एक मामला सामने आया है। पॉजिटिव आए व्यक्ति की उम्र 48 वर्ष है। वह भारतीय सेना में तैनात है। प्रशासन से जुटाई गई जानकारी के अनुसार सेना का जवान 24 जून को दिल्ली आर्मी कैंट से पांवटा साहिब आया था। यहां पर स्क्रीनिंग के पश्चात उसे पांवटा साहिब में संस्थागत क्वारंटीन किया गया। इस व्यक्ति का सैंपल 26 जून को लिया गया था। रविवार को इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
उपायुक्त सिरमौर डॉ. आरके परूथी ने बताया कि पॉजिटिव आए सेना के जवान को त्रिलोकपुर में बने कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट किया गया है। जिले में अब कोरोना संक्रमण के कुल 38 मामले हो गए हैं। इनमें से 14 मामले एक्टिव हैं, जबकि 17 ठीक हो गए हैं। सात लोग यहां से हरियाणा के लिए माइग्रेट हुए हैं।

कोरोना का खौफ: रोडवेज बस चालक-परिचालक बोले- नौकरी से निकाल दो, लेकिन ड्यूटी नहीं करेंगे



मेरठ. कोरोना से बचने के लिए लोग अपनी नौकरी भी दाव पर लगा रहे हैं। रोडवेज के चालक और परिचालकों ने अधिकारियों से साफ-साफ कह दिया है कि वे डयूटी पर नहीं आएंगे। इसके लिए चाहे तो उनकी संविदा समाप्त कर दी जाए। बता दें कि रोडवेज में इस समय अधिकांश चालक और परिचालक संविदा पर काम कर रहे हैं। कोरोना महामारी के चलते अधिकांश रोडवेज बसों का संचालन चालकों की अनुपस्थिति के कारण नहीं हो पा रहा है। चालकों को कोरोना संक्रमित होना का भय बना हुआ है। वहीं रोडवेज अधिकारी ड्यूटी पर अनुपस्थित रहने वाले चालकों की सेवा समाप्त करने की बात कर रहे हैं।
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डिपो प्रभारी बीपी सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते डिपो में संविदा पद पर कार्यरत अधिकांश चालक और परिचालक ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। इसके कारण प्रतिदिन 40 से 50 प्रतिशत बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। मेरठ डिपो में नियमित कुल 112 एवं संविदा के 200 से अधिक चालक हैं, जिसमें से अधिकांश नियमित चालक प्रतिदिन ड्यूटी पर आ रहे हैं। वहीं, संविदा के अधिकांश चालक लॉकडाउन से अब तक ड्यूटी पर नहीं आए हैं। चालक न आने के कारण बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इससे निगम की पचास से अधिक बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं। बसों का संचालन न होने से निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
डिपो प्रभारी ने बताया कि सभी चालकों को ड्यूटी पर बुलाया जा रहा है। उसके बाद भी वह आने को राजी नहीं है। फोन पर बात करने पर अधिकांश चालक बता रहे हैं कि अभी कोराना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इसके कारण ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। डिपो प्रभारी ने बताया कि अगर अनुपस्थित चालक एक जुलाई तक ड्यूटी पर नहीं आए तो सभी की संविदा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके जिम्मेदार वह स्वयं होंगे। ऐसी ही कुछ हालात परिचालकों की भी है। वे भी डयूटी से कन्नी काट रहे हैं।
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Saturday, June 27, 2020

बस में सवार यात्री निकला कोरोना पॉजिटिव, यात्री बस से उतरकर भागे



 
कड्लूर जिले में चलती सरकारी बस में उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई जब सफर के दौरान एक व्यक्ति को अचानक अधिकारियों ने फोन कर कोरोना वायरस से संक्रमित होने की बात कहीं। हालांकि अधिकारियों को ये पता नहीं था कि वह व्यक्ति बस में सफर कर रहा था। जब बस में सवार अन्य यात्रियों को यह जानकारी हुई तो हडकंप मच गया और वे बस से उतरकर भाग गए। ये वाक्या कड्लूर जिले के वडलूर से पनरूटी के निकट कडमपूलीयूर जाने के दौरान घटी।
दरअसल, हुआ कुछ यूं कि वडलूर निवासी 57 वर्षीय व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ सरकारी बस में सफर कर रहा था। वे वडलूर से कडमपूलीयूर अपने रिश्तेदारों से मिलने जा रहा था। उसी दौरान जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उन्हें फोनकर बताया कि वे कोविड़-19 से संक्रमित है। यह सुनते ही उनके होश उड़ गए। अधिकारियों ने उस व्यक्ति से कहा कि वह जहां है वहीं रहें। एम्बुलेंस आकर उसे अस्पताल ले जाएगी। लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह आखिर करें तो क्या करे और उसके लोकेशन का भी पता नहीं था।
लोकेशन पता नहीं होने पर अधिकारियों ने कंडक्टर से बात कराने का आग्रह किया। उस व्क्ति ने मोबाइल कंडक्टर को दे दिया। कंडक्टर ने जैसे ही सुना कि उसके बस में सफर करने वाला यात्री कोरोना संक्रमित है, वह डर गया। वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाया जब उसे यह एहसास हुआ कि उसने संक्रमित व्यक्ति का मोबाइल हाथ में लेकर बात की। वह उस व्यक्ति पर चिल्लाने लगा। 

फिर क्या था, बस में सवार सभी 15 यात्रियों को पता चला गया कि वह कोरोना संक्रमित है, बस से उतरकर भाग गए। अधिकारी उन सभी यात्रियों की पहचान कर उनकी तलाश कर रहे है।
अधिकारियों के अनुसार वह व्यक्ति टीबी मरीज है। उसका अप्रैल महीने से कड्लूर अस्पताल में इलाज चल रहा था। रविवार को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था, डिस्चार्ज करने से पहले उसका कोरोना टेस्ट के लिए स्वैब सैंपल लिए गए थे। उसे हिदायद दी गई थी कि वह कोरोना का रिपोर्ट आने तक खुद को आइसोलेशन में रखे लेकिन वह अपनी पत्नी के साथ बस में सफर करने लगगा। अधिकारियों ने मामबट्टू में उतरकर इंतजार करने को कहा। एम्बुलेंस से उसे अस्पताल ले जाया गया जहां उसे कोविड़-19 केयर वार्ड में रखा गया है।