Covid 19

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Wednesday, July 15, 2020

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 10 साल से कम सेवा पर भी सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन

नई दिल्ली, प्रेट्र। रक्षा मंत्रालय ने 10 साल से कम सेवा देने वाले सैनिकों के लिए बुधवार को दिव्यांगता पेंशन की अनुमति दे दी है। अभी तक यह पेंशन सशस्त्र बलों के सिर्फ उन जवानों को दी जाती थी, जिन्होंने 10 साल से अधिक की सेवा दी है और उन कारणों से दिव्यांग हुए हैं जो सैन्य सेवा से संबद्ध नहीं हैं।

दरअसल, अभी तक दिव्यांग होने के समय यदि किसी सैनिक की सेवा 10 साल से कम की होती थी, तो उसे सिर्फ दिव्यांगता ग्रेच्युटी का ही भुगतान किया जाता था। मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि सशस्त्र बलों का कोई भी कर्मी, जिसकी सेवा 10 साल से कम है और काम करने में असमर्थ होने के कारण उसे स्थायी रूप से हटा दिया गया है, वह भी इस फैसले से लाभान्वित होगा।

इस आशय के प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंजूरी प्रदान दे दी है। नया नियम चार जनवरी 2019 से प्रभावी होगा।

मोदी सरकार सैनिकों और उनके परिवार के सदस्‍यों के लिए कई कदम उठा रही है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को हेल्थ केयर देने के लिए बनी स्कीम एक्स सर्विसमैन काट्रिब्यूट्री हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत पूर्व सैनिकों के 25 साल और उससे अधिक आयु के अविवाहित और दिव्यांग बेटों को लाभार्थी बनाने का फैसला लिया। इस योजना के तहत परिवार के एक कोरोना पीडि़त मरीज को ऑक्सीजन देने का खर्च उठाने का भी एलान किया गया है।

Wednesday, July 8, 2020

भारतीय सेना ने अपने सभी अधिकारियों और जवानों के लिए सोशल साइट्स के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपने सभी अधिकारियों और जवानों के लिए सोशल साइट्स के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंधित सोशल प्लेटफॉर्म में फेसबुक, इंस्टाग्राम के अलावा लगभग 89 साइट्स हैं। सेना ने सख्त निर्देश के साथ निर्देश दिया है कि आपके खाते को प्रतिबंधित साइटों और सोशल मीडिया से हटा दिया जाए, बस इसे सक्रिय करने से काम नहीं चलेगा। यह भी चेतावनी दी गई है कि 15 जुलाई के बाद जांच होगी, जिसमें खाता चालू होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वास्तव में, सैन्य अधिकारियों, कर्मचारियों या सैनिकों के सोशल मीडिया, साइटों, नेटवर्किंग में सक्रिय होने पर खुफिया जानकारी लीक होने का खतरा है।

खुफिया एजेंसियों ने हनी ट्रैप में फंसने के सभी मामलों का पर्दाफाश किया है। कुछ महीने पहले ही, तमिलनाडु के सात नौसैनिकों द्वारा शहद के जाल में फंसकर गोपनीय जानकारी लीक करने का मामला सामने आया था। कई मामलों में, खुफिया तंत्र ने पहले ही खुद को हनी ट्रैप में फंसने से बचा लिया है। इसलिए, मौजूदा माहौल को देखते हुए, भारतीय सेना ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना ने अपने सभी अधिकारियों और जवानों को निर्देश दिया है कि वे फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सहित सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से अपने खातों को हटा दें। फेसबुक, इंस्टाग्राम के अलावा, 89 साइट्स जिन पर प्रतिबंध है, उनमें वी चैट, वाइबर, जूम, ट्रू कॉलर, पबजी, क्लब फैक्ट्री, टिंडर, डेली हंट, हंगामा, सोंग्स.कॉम पीके शामिल हैं। आदेश में व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, यू / ट्यूब, ट्विटर, कोरा, लिंकडॉन के सीमित उपयोग की अनुमति है। आदेश में यह भी कहा गया है कि youtube, ट्वीटर, का उपयोग केवल सूचना के लिए किया जा सकता है। यानी, इसकी ओर से कुछ भी अपलोड नहीं किया जा सकता है।

आदेश में सख्त चेतावनी दी गई है कि 15 जुलाई के बाद जांच की जाएगी कि सभी निर्देशों का पालन किया गया है या नहीं। अगर किसी अधिकारी या जवान का अकाउंट प्रतिबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाया गया, तो संबंधित यूनिट की खुफिया जानकारी की जांच की जाएगी। यह फीड बैक निचले स्तर से ऊपरी स्तर तक प्रत्येक ब्रीफिंग में कहा जाएगा।

फेसबुक पर सख्त प्रतिबंधों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जो जासूसी के मामले में सबसे खतरनाक माना जाता है। अब तक, हनी ट्रैप के ज्यादातर मामले फेसबुक के माध्यम से सामने आए हैं। संबंधित जानकारी प्राप्त करना आसान है। सेना के लोग ट्विटर का उपयोग कर सकेंगे क्योंकि यह प्रतिबंधित नहीं किया गया है। सोशल मीडिया के बारे में सेना की पहले की एडवाइजरी में, उन्हें केवल वर्दी में अपनी तस्वीरें पोस्ट करने और स्थान की जानकारी साझा करने से मना किया गया था, लेकिन अब देश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए सेना को सख्त होना होगा।

Monday, July 6, 2020

LAC निगरानी के लिए अमरीका से अब प्रीडेटर-बी ड्रोन खरीदेगा भारत

नई दिल्ली: पूर्वी लद्दाख में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से चले गतिरोध के बीच भारत ने कम ऊंचाई पर अधिक देर तक उड़ान भरने वाले अमरीकी सशस्त्र प्रीडेटर-बी ड्रोन खरीदने में रुचि दिखाई है। यह ड्रोन न सिर्फ खुफिया जानकारी इकट्ठा करता है, बल्कि लक्ष्य का पता लगाकर उसे मिसाइल और लेजर गाइडेड बम से नष्ट कर देता है।
 हालांकि अमरीका ने चार अरब डॉलर से अधिक के 30-सी गार्डियन बेचने की पेशकश की है।

राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों को लगता है कि सर्विलांस और टारगेट पर हमले के लिए एक ही ड्रोन हो, न कि अलग-अलग। भले ही भारतीय नौसेना अमरीका से बातचीत में मुख्य भूमिका निभा रही है, लेकिन भारतीय सेना प्रीडेटर-बी के पक्ष में है। भारत फिलहाल पूर्वी लद्दाख में इसराईली 'हेरोन' ड्रोन का इस्तेमाल करता है।

चीन की बात करें तो उसके पास विंग लूंग-2 सशस्त्र ड्रोन है। इसके अलावा वह पाकिस्तान को भी सप्लाई करने की तैयारी में है। पाकिस्तान अपनी वायुसेना द्वारा उपयोग के लिए 48 सशस्त्र ड्रोन का संयुक्त रूप से उत्पादन करने के लिए चीन से करार कर रहा है। विंग लूंग-2 के सैन्य संस्करण जीजे-2 को हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस बताया गया है। वर्तमान में सीमित सफलता के साथ लीबिया के गृहयुद्ध में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

Thursday, July 2, 2020

चीन से टकराव के बीच रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए 21 मिग 29 और 12 सुखोई 30 एमकेआई विमानों की खरीद को मंजूरी दी


वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन से टकराव के बीच रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए 21 मिग 29 और 12 सुखोई 30 एमकेआई विमानों की खरीद को मंजूरी दी है। तीनों सेनाओं की अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद भी की जाएगी। रूस से मिग और सुखोई खरीदने के भारत के फैसले को कम वक्त और कम लागत के कारण मुफीद माना जा रहा है।

बता दें कि मिग 29 बीते 35 सालों से भारत के जंगी बेड़े का भरोसेमंद साथी रहा है। मिग 29 मिराज के साथ कारगिल युद्ध में पाक ठिकानों को ध्वस्त कर पराक्रम दिखा चुका है।

ऊंचाई पर अचूक साबित हुआ

1999 में कारगिल युद्ध में पाक ने 15 हजार फीट की ऊंचाई पर ठिकाने बना लिए थे पर मिग 29 से निशाने से दुश्मनों को खदेड़ने में देर नहीं लगी।

बता दें कि पाकिस्तान सीमा से 100 किलोमीटर और चीन से 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आदमपुर बेस स्टेशन पर मिग निगहबानी में पहले से तैनात है।

मिग 29 की विशेषताएं

-मिग 29 तैयार किए जाने से लेकर 40 साल तक सेवाएं देने में सक्षम है।
-आसमान की ओर सीधे 90 डिग्री कोण में टेकऑफ संभव है।

इस खरीद को चीन से भारत के विवाद के नजरिेए से अच्छा माना जा रहा है।
-दुश्मन के विमान को देख 5 मिनट में टेकऑफ की क्षमता है।
-हवा से हवा, हवा से सतह और हवा समुद्री कार्रवाई में सक्षम है।

भारत ने लद्दाख में स्पेशल फोर्सेज की तैनाती की

  • भारत ने लद्दाख में स्पेशल फोर्सेज की तैनाती की
  • देश में 12 से अधिक स्पेशल फोर्सेज की रेजिमेंट


चीन से जारी तनाव के बीच भारत ने लद्दाख में स्पेशल फोर्सेज की तैनाती की है. सूत्रों के मुताबिक, देश के अलग-अलग स्थानों से पैरा स्पेशल फोर्स की यूनिट को लद्दाख में ले जाया गया है, जहां वे अभ्यास कर रहे हैं. स्पेशल फोर्सेज ने 2017 में पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक में अहम भूमिका निभाई थी. सूत्रों ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उनका इस्तेमाल चीन के खिलाफ भी किया जा सकता है.

स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ियों को पूर्वी लद्दाख में तैनात किया गया है. उन्हें उनकी भूमिकाओं के बारे में पूरी तरह से अवगत कराया गया है, जिसे चीन के साथ दुश्मनी बढ़ने पर अंजाम देना पड़ सकता है.

भारत में 12 से अधिक स्पेशल फोर्सेज की रेजिमेंट हैं जो अलग-अलग इलाकों में ट्रेनिंग लेती हैं. जम्मू और कश्मीर में तैनात स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ियां लेह में और उसके आस-पास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नियमित रूप से वारगेम्स का अभ्यास करती हैं.

बता दें कि भारत और चीन के बीच मई के शुरुआती दिनों से ही तनाव बना हुआ है. ये तनाव 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़क के बाद और बढ़ गया. इस झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे, जबकि चीन ने अपने सैनिकों के मारे जाने की कोई जानकारी नहीं दी.

दोनों देश बातचीत के जरिए LAC पर जारी तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों में कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है. चीन एक ओर बातचीत का दिखावा करता है तो वहीं वो धोखे से भारत के सैनिकों पर वार भी कर चुका है.

वहीं, भारत अपने सैनिकों की शहादत का बदला चीन से लेना शुरू कर चुका है. सरकार चीन को आर्थिक मोर्चे पर चोट पहुंचा रही है. मोदी सरकार ने चीन के 59 ऐप्स को बैन करके उसे बड़ा झटका दिया. इसके अलावा चीन की कंपनियों से करार भी रद्द किए जा रहे हैं.

चीन से तनाव के बीच मोदी सरकार कई बड़े फैसले भी ले रही है. गुरुवार को ही रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 21 मिग-29 और 12 सुखोई (एसयू-30 एमकेआई) लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी गई. इसके साथ ही 59 मिग-29 लड़ाकू विमानों के अपग्रेडेशन की भी मंजूरी दी गई है. मिग-29 लड़ाकू विमानों की खरीद रूस से की जाएगी. साथ ही मौजूदा मिग-21 लड़ाकू विमानों का अपग्रेडेशन भी से कराया जाएगा.

Sunday, June 28, 2020

लद्दाखः गलवान घाटी में दो और भारतीय सैनिकों ने गंवाई जान



लद्दाखः दोनों सैनिकों के परिजनों का कहना कहना कि उन्हें बताया गया कि ये गलवान क्षेत्र में 'एक पुल का निर्माण' करने वाली टीम का हिस्सा थे। वहीं, रक्षा सूत्रों ने कहा कि सचिन की मौत गुरुवार को हुई है।

लद्दाखः गलवान घाटी में दो और भारतीय सैनिकों ने गंवाई जान

नई दिल्लीः पूर्वी लद्दाख में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध के बीच गलवान घाटी में दो और भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है। दरअसल, दोनों सैनिकों की मौत नदी में डूबने से हुई है। मालेगांव के रहने वाले नायक सचिन विक्रम (37) और पटियाला के लांस नायक सलीम खान (23) शहीद हो गए हैं। दोनों सैनिकों का अंतिम संस्कार शनिवार को किया गया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि ये दुर्घटनाएं हैं और गलवान घाटी में मौजूदा स्थिति से जुड़ी घटना नहीं हैं। दोनों सैनिकों के परिजनों का कहना कहना कि उन्हें बताया गया कि ये गलवान क्षेत्र में 'एक पुल का निर्माण' करने वाली टीम का हिस्सा थे। वहीं, रक्षा सूत्रों ने कहा कि सचिन की मौत गुरुवार को हुई है और सलीम के परिवार ने कहा कि उनके शहीद होने की सूचना शुक्रवार को मिली है।

सलीम के चाचा ने कहा- दो दिन पहले हुई थी बात

सलीम के चाचा बुद्दीन खान ने कहा, 'हमें बताया गया है कि एक पुल का निर्माण किया जा रहा था और सलीम उस टीम का हिस्सा थे। वह एक नाव में थे जो पलट गई और वह डूब गए।' सलीम की मां नसीमा बागुम ने कहा, 'उन्होंने आखिरी बार दो दिन पहले उनसे बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह जल्द ही घर आएंगे। उन्होंने वहां की स्थिति का विवरण कभी नहीं दिया... उन्होंने कहा कि फोन कनेक्टिविटी की समस्या हो सकती है इसलिए चिंता न करें। मैंने सब कुछ खो दिया है। वह हमारा एकमात्र सहारा था।'

सचिन ने पापा को बताया था, गलवान घाटी की स्थिति गंभीर है

सचिन के पिता विक्रमने कहा, 'उन्होंने आखिरी बार 10 दिन पहले उनसे बात की थी। सचिन ने मुझे बताया था कि गलवान घाटी की स्थिति गंभीर है। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया कि वह ठीक हैं और चिंता करने की जरूरत नहीं है।' आपको बता दें, इस समय भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी में पिछले कुछ सप्ताह से अधिक समय से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। गत 15 जून को गलवान घाटी में हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैन्यकर्मियों के शहीद हो गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था।

Friday, June 26, 2020

गलवान वैली में तैनात है जवान, इधर परिवार का पड़ोसी ने जीना कर दिया है दुश्वार



गलवान वैली में तैनात है जवान, इधर परिवार का पड़ोसी ने जीना कर दिया है दुश्वार.
रांची: अपने ही घर में कैद हो गयी हूं. पड़ोसी ने रास्ते को बंद कर दिया है. घर पर दो बच्चे हैं और मुझे बंद रास्ते के बीच लद्दाख के गलवान घाटी में तैनात पति सेना के जवान विजय टेटे की चिंता सताती है. रुंधे गले से पत्नी नवनीत मेरी टेटे ने कहा कि 14 महीने पहले वो अपने घर रांची आए थे, कहा था सब कुछ ठीक होगा, लेकिन यहां तो पड़ोसियों ने जीना दुश्वार कर दिया है. 

मामले को संज्ञान में लेते हुए रांची डीसी ने CrPC 133 का हवाला देते हुए कहा कि किसी का भी रास्ता नहीं  रोका जा सकता है, जबकि नामकुम की अंचल अधिकारी शुभ्रा रानी ने कहा इस मामले पर हस्तक्षेप करते हुए रास्ता निकाला जाएगा.

दरसअल, रांची के नामकुम थाना क्षेत्र के तेतरी के रहने वाले विजय टेटे ने यहां 2010 में अपना घर बनाया और मार्च 2011 में शिफ्ट कर गए. उस वक्त वो जमीन के खरीद में दिए गए नक्शे के रास्ते से ही आना जाना करते थे, लेकिन 2016 में पड़ोसियों ने रास्ते में पहले बाउंड्री बनाया फिर धीरे-धीरे रास्ते को बंद कर दिया. 

मामले को लेकर विजय टेटे ने मुख्यमंत्री सचिवालय में शिकायत की थी, एक बार अंचल अधिकारी जमीन का निरीक्षण करने आए थे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुआ. पत्नी नवनीत मेरी टेटे ने कहा कि गलवान घाटी के हालात के बीच 4 दिन पहले ही अपने पति विजय से बात हुई है. 

बेटे विशाल टेटे कहते हैं कि पिताजी से पिछले चार दिनों पहले बात हुई थी. लद्दाख के गलवान घाटी के तनावपूर्ण हालात के बीच उन्हें घर के रास्ते की समस्या को लेकर ज्यादा बात नहीं करता हूं. अब पड़ोसियों ने जो हालात बना दिए हैं, इससे और चिंता सता रही है कि आखिर अपने घर में कैसे आना-जाना कर पाएंगे.

5 दिन बाद करनी थी घर वापसी लेकिन ड्युटी पर ही हो गए शहीद, पंच तत्वों में विलीन हुए ओमप्रकाश



टोहाना(सुशील): वीरों की माटी में जन्मे हरियाणा के लाल ओमप्रकाश देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हो गए थे जिनका आज राजकीय सम्मान के साथ उनका दाह-संस्कार किया इनके गांव में किया गया ।
टोहाना के गांव समैन के निवासी ओमप्रकाश जो कि सेना में अपनी सेवाए दे रहे थे गत दिवस डयुटी के दौरान उन्होनें अन्तिम सांस ली। शहीद ओमप्रकाश के परिवार को इसकी सूचना सेना के अफसरों के द्वारा दी गई।

आज उनका पार्थिव शव गांव में पहुचा तो उपमण्डल टोहाना व आस-पास से भारी संखया में जनसैलाब वहां पर उमडा। इस मौके पर राजकिय सममान से उनका अन्तिम संस्कार किया गया। जानकारी के अनुसार वर्ष 1889 में ओमप्रकाश सेना में भर्ती हो गए थे वा एक गरीब परिवार से थे व बेहद मेहनती बताए गए हैय़ जीवन की विकट परिस्थितियों से उन्होनें कभी भी हार नहीं मानी।

तकरीबन 52 वर्षीय शहीद ओमप्रकाश आर्मी में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। ओमप्रकाश की ड्यूटी पाकिस्तान के सांभा बॉर्डर पर थी, गुरुवार को परिवार के पास ओमप्रकाश के शहीद होने की सूचना आई जिसके बाद परिवार व गांव में शौक की लहर दौड़ गई। उनके बेटे संजु ने बताया कि उनके पिता की शहादत पर उन्हे गर्व है। उन्होनें बताया कि कोविड के चलते वो घर नहीं आ रहे थे अभी एक जुलाई यानी 5 दिन बाज उन्हें घर पर आना था इससे पहले यह घटना हो गई।
उन्होनें बताया कि उन्हें व उनके परिवार को उनकी शहादत पर गर्व है कि। इस मौके पर टोहाना के विधायक दवेन्द्र सिंह बबली व भाजपा प्रदेशअध्यक्ष सुभाष बराला भी पहुंचे।उन्होने शहीद परिवार को ढाढस बंधाया। शहीद के दो बेटे हैं, जिसमें एक की आयु 25 वर्ष व दूसरे की 21वर्ष है।