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Tuesday, July 14, 2020

सचिन पायलट को राजस्थान के डिप्टी CM और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है


राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए सचिन पायलट को राजस्थान के डिप्टी CM और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. इस बीच खबर आ रही है कि बीजेपी ने सचिन पायलट को अपनी पार्टी ज्वाइन करने का न्योता दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी नेता नेता ओम माथुर का कहना है कि अगर सचिन पायलट बीजेपी में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है.

वहीं बीजेपी नेता उमा भारती ने कहा है-

सारा संकट राहुल गांधी और उनके खानदान के कारण है, क्योंकि वो इतना अपमान करते हैं नौजवानों का उनको इतना नीचा दिखाते हैं उनसे इतनी ईर्ष्या रखते हैं .जब तक राहुल गांधी खानदान के लोग कांग्रेस में रहेंगे कांग्रेस पाताल में चली जाएगी.

राजस्थान में हालिया सियासी उठापटक तब तेज हुई जब राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) ने राज्य में विधायकों की खरीद-फरोख्त और निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने के आरोपों के संबंध में शुक्रवार को एक मामला दर्ज किया था.

गहलोत और पायलट के बीच लंबे समय से 'टकराव'

राजस्थान में दिसंबर 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने से पहले ही गहलोत और पायलट के बीच तकरार शुरू हो गई थी. विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन के दौरान विवाद सामने आया था, इसके बाद यह तब बढ़ गया जब पार्टी हाई कमान ने अनुभवी गहलोत को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना.

साल 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद सचिन पायलट को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका दी गई थी. इसके बाद उन्होंने और उनके समर्थक कार्यकर्ताओं/नेताओं ने कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए जो संघर्ष किया था, जाहिर तौर पर उसी के हिसाब से उन्होंने पार्टी/सरकार में भागीदारी की उम्मीद की होगी. पायलट ने अपने एक भाषण में इसके संकेत भी दिए थे.

Sunday, July 12, 2020

राजस्थान में अशोक गहलोत-सचिन पायलट के बीच ठनी, कांग्रेस विधायकों के लिए व्हिप जारी

जयपुर/नई दिल्‍ली : राजस्‍थान में सियासी संकट गहराता जा रहा है। नाराज उपमुख्‍यमंत्री सचिन पायलट के साथ 30 विधायकों के जाने के दावों के बीच कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का कहना है कि यहां मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पूरी तरह सुरक्ष‍ित है। राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष अविनाश पांडे ने कहा कि गहलोत सरकार पूरी तरह सुरक्षित है और 109 विधायकों ने उन्‍हें समर्थन पत्र सौंपा है। आज कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी होने वाली है, जिसमें सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए व्हिप जारी किया गया है।

राजस्‍थान में सचिन पायलट और उनके समर्थकों के कांग्रेस नेतृत्‍व और गहलोत खेमे से नाराज चलने की खबरों के बीच अविनाश पांडे ने रविवार देर रात प्रेस कॉन्‍फेंस कर कहा कि गहलोत सरकार को कोई खतरा नहीं है और सरकार सुरक्षित है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान के 109 विधायकों ने समर्थन पत्र सौंपा है, जिसमें उन्‍होंने सीएम अशोक गहलोत वाली राजस्‍थान सरकार और सोनिया गांधी व राहुल गांधी के नेतृत्‍व में समर्थन जताया है। कुछ अन्‍य विधायकों के साथ फोन पर बातचीत हो रही है और भी सुबह तक समर्थन पत्र पर हस्‍ताक्षर कर देंगे।

Thursday, July 2, 2020

15 साल का बालक भारत कुमार, जिसके बाएं हाथ और बाएं पैर में तकलीफ की


जयपुर

15 साल का बालक भारत कुमार, जिसके बाएं हाथ और बाएं पैर में तकलीफ की थी, गर्दन में दर्द था। इसके परिजनों ने मुझे दिखाया।

सीटी स्कैन और एमआरआई करने के बाद ऑपरेशन के अलावा दूसरा चारा मुझे दिखाई नहीं दिया। मैंने परिजनों से ऑपरेशन की गंभीरता के बारे में हर पहलू पर विस्तार से बात की।

उन्होंने मुझपर विश्वास जताते हुए तुरंत हामी भर दी है। एक अनजान डॉक्टर के ऊपर विश्वास जताना और एक ऐसे डॉक्टर के ऊपर विश्वास जताना, जो किसी मरीज के गांव का हो और करीबी हो, इसमें काफी अंतर होता है।

हालांकि मुझे पता था कि इस ऑपरेशन में कितनी गंभीरता थी और सर्जरी के दौरान ही बच्चे की जान भी जाने का खतरा था।

लेकिन बच्चा मेरे गांव का था, तो मेरी भावनाएं ज्यादा जुड़ी हुईं थीं।

यह तकरीबन सभी के साथ होता है कि व्यक्ति जब मानवता से देश की तरफ, देश से राज्य की ओर, राज्य से जिले की तरफ और जिले से तहसील ओर होते हुए गांव की तरफ बढ़ता है तो लोगों के साथ उसका भावनात्मक जुड़ाव अधिक होने लगता है, यही मेरे साथ हुआ।

अपने पिछले 11-12 साल के करियर में मैंने ऐसे दो या तीन बार ही ऐसे गंभीर ऑपरेशन किए थे, लेकिन बच्चा मेरे गांव का होने के कारण मुझे किसी भी सूरत में ऑपरेशन करना ही था।

बच्चा न केवल मेरे गांव का है, बल्कि उसके साथ ही परिजन बेहद गरीब स्थिति में हैं और ऐसे ऑपरेशन का खर्चा भी काफी होता है। लेकिन मैंने तय किया कि इस ऑपरेशन के लिए मैं अपनी फीस तो छोड़ो, दूसरा कोई खर्चा भी चार्ज नहीं करके सफलतापूर्वक अंजाम दूंगा।

सर्जरी लगभग 7 घंटे चली। मैंने यह ऑपरेशन लागत से करीब 4 गुना कम दर पर किया। आज मुझे खुशी इस बात की भी है कि मेरे गांव के लोग, मेरे जिले के लोग, मेरे प्रदेश के और देश के लोग जिस विश्वास के साथ मेरे पास उपचार करवाने के लिए आते हैं, उसपर मैं खरा उतरने का प्रयास करता हूं और ऊपर वाले के आशीर्वाद से खरा उतरता हूं।

बच्चे का ऑपरेशन करने के बाद मुझे केवल इस बात का संतोष नहीं है कि मैंने एक मरीज को ठीक करने की कोशिश की, बल्कि उससे बढ़कर मुझे इस बात की भी खुशी है कि एक गरीब परिवार, जो मेरे गांव का है और भावनात्मक तौर पर मेरे से काफी जुड़ा हुआ है, उसके एक सदस्य को नया जीवन देने हेतु भगवान ने मुझे सक्षम बनाया।

ईश्वर से प्रार्थना है कि मानव मात्र की सेवा के लिए मेरे द्वारा किया जाने वाला हर प्रयास सफल हो, इसी उम्मीद के साथ भगवान को कोटि-कोटि धन्यवाद और आप सभी चाहने वालों को सादर नमस्कार.

शादी वाले घर में खुशियों की जगह मातम पसर गया


जोधपुर। जोधपुर रेंज के जैसलमेर स्थित बोहा गांव में एक शादी वाले घर में खुशियों की जगह मातम पसर गया। एक सडक़ हादसे में दुल्हन सहित चार लोगों की मौत हो गई। हादसे में दूल्हा दुल्हन को जोधपुर रैफर किया गया था लेकिन बीच रास्ते दुल्हन ने दम तोड़ दिया। दूल्हे का जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में उपचार चल रहा है। गुरुवार सुबह शवों का पोस्टमार्टम करवाने के साथ गांव वालों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया। घटना बुधवार रात को होना बताया जाता है।

जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ पुलिस थानाधिकारी माणकराम ने गुरूवार को बताया कि निकटवर्ती बोहा गांव में ओमप्रकाश भील की बुधवार को शादी हुई थी।

बुधवार को ही बारात दिन में निकट के चूंदी गांव गई थी। एक इनोवा में दूल्हा दुल्हन सहित आठ लोग सवार होकर घर लौट रहे थे। तब इनकी कार बोहा- देवा गांव की सरहद में अगला टायर फटने से नियंत्रित होकर तीन चार पलटी खा गई।

थानाधिकारी ने बताया कि इस कार में सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि दूल्हा ओमप्रकाश व दुल्हन सुशीला गंभीर रूप से घायल होने पर जोधपुर रैफर किया गया। मगर दुल्हन सुशीला की बीच रास्ते ही मौत हो गई। इस पर दुुल्हन के शव को जैसलमेर लाया गया। चारों मृतकों का आज सुबह पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजन को सौंपे गए। इस हादसे में इनोवा का चालक भी खत्म हो गया। दूल्हे ओमप्रकाश का जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में उपचार चल रहा है।

Wednesday, July 1, 2020

जयपुर में कोरोना मरीज से अस्पताल में हुआ ऐसा बर्ताव, लगा लिया मौत को गले


कमलेश अग्रवाल / जयपुर। यहां पर कोई इलाज नहीं होता...यहां पर सीधा लाकर पटक देते हैं....और इसीलिए मैं आत्महत्या कर रहा हूं...मैं बहुत दुखी हूं...यह बात कोरोना संक्रमित नवरतन ने 14 सैकेंड के वीडियो में कही है जो पत्रिका के पास मौजूद है। वीडियो अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान नवरतन ने अपने मोबाइल में रिकार्ड किया है। नवरतन का शव परिजनों को 19 जून को सवाई मानसिंह चिकित्सालय की मोर्चरी में मिला है। परिजनों को नवरतन के मौत की सूचना किसी परिचित के जरिए दो दिन बाद मिली थी।

जयपुर के ब्रह्मपुरी निवासी नवरतन महावर को 15 जून को कोरोना संक्रमिक होने के बाद आरयूएचएस में भर्ती किया गया था। नवरतन के बेटे सूरज ने बताया कि निजी स्तर पर पैसे देकर कोरोना जांच करवाई थी। फोन करके मेडिकल टीम को बुलाया और सभी दस्तावेज देकर अस्पताल भेजा था। उनके साथ आधार, परिचय पत्र सहित पूरी मेडिकल हिस्ट्री थी ताकि किसी तरह की परेशानी नहीं हो। अस्पताल में उनके पिता का सही तरीके से इलाज नहीं किया गया। उनसे पहले दिन और दूसरे दिन बात हुई जिसमें भी उन्होंने बोला की यहां इलाज नहीं हो रहा है कोई देखभाल नहीं हो रही है। इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। 19 जून को उनके परिचित का फोन आया था जिससे पिता की मौत की जानकारी मिली। अस्पताल प्रशासन या आरयूएचएस ने कभी नहीं बताया कि उनके पिता की मौत हो गई है।
मोबाइल में मिला वीडियो
सूरज ने बताया कि 20 जून को आरयूएचएस से पिताजी का मेडिकल रिकार्ड और दूसरा सामान लेने गए थे। अस्पताल प्रशासन ने सामान होने से साफ इनकार कर दिया। घंटों तक बहस करने के बाद एक कर्मचारी से मोबाइल मिला। उसे लाकर अब देखा तो उसमें यह वीडियो मिला है जिसमें नवरतन ने अस्पताल की अव्यवस्थाओं से परेशान होकर आत्महत्या की बात कही है।
उठते हैं बड़े सवाल
नवरतन के बेटे सूरज ने कहा कि उनके पिता को कोरोना ने नहीं अव्यवस्थाओं ने मारा है। इसकी जांच होनी चाहिए कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अपने पैरों पर चलकर उनके पिता अस्पताल गए और वहां पर उनकी मौत हो गई उन्होंने आत्महत्या करने की जैसी बात क्यों बोली। समय पर मौत की जानकारी नहीं देने के लिए जिम्मेदार कौन है जबकि उनके पास मोबाइल, आधार सहित दूसरे परिचय पत्र मौजूद थे। इस संबंध में सूरज ने उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर करने की बात कही है।

Monday, June 29, 2020

चिड़ावा की अध्यापिका की कार डूबी, मां-बेटी की मौत




चिड़ावा.राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बृजलालपुरा गांव की मां-बेटी की श्रीगंगानगर में नहर में डूबने से मौत हो गई। जिनका शनिवार को मृतका के ससुराल बृजलालपुरा गांव में अंतिम संस्कार किया गया। 
श्रीगंगानगर के घमूड़वाली थाना प्रभारी करतार सिंह ने बताया की गांव जीवनदेसर के राजकीय विद्यालय की अध्यापिका संतोष (27) का पीहर बींझबायला में तथा ससुराल चिड़ावा तहसील के बृजलालपुरा गांव में है। शुक्रवार दोपहर को अध्यापिका संतोष जीवनदेसर स्कूल में ड्यूटी करके दोपहर को अपनी कार से बेटी हवीसा (7 साल) व डेढ़ वर्षीय बेटे नंदी के साथ घर वापस बींझबायला आ रही थी। कार को संतोष ही चला रही थी। जब वह लाडूवाली-हुणतपुरा के पास गंगनहर की घोडापुली पर पहुंची तो कार अनियंत्रित होकर नहर में जा गिरी। यह देखकर वहां आस-पास के लोग एकत्र हो गए। लोगों ने अध्यापिका संतोष व उसके डेढ़ वर्षीय पुत्र नंदी को आगे की खिड़की खोलकर बाहर निकाला। बच्ची हवीसा लोगों को नहीं मिली। मामले की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। पुलिस ने पहुंचकर ग्रामीणों के सहयोग से कार को नहर से बाहर निकलवाया। जहां कार की पीछे की सीट पर बच्ची अचेत अवस्था मिली। पुलिस ने महिला व उसके दोनों बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घमूड़वाली पहुंचाया। जहां से तीनों को गंभीर हालत में राजकीय चिकित्सालय रैफर कर दिया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान मां व बेटी ने दम तोड़ दिया। बालक नंदी का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलने के बाद पीहर पक्ष के लोग भी मौके पर पहुंचे।

बेटी को पहली बार स्कूल लाई थी

अध्यापक सोमदत्त के अनुसार संतोष अपने पीहर बींझबायला से जीवनदेसर के सरकारी स्कूल में प्रतिदिन कार में ड्यूटी पर आती थी। साथ में उसका डेढ़ वर्षीय पुत्र नंदी भी होता था। लेकिन हादसे के दिन वह अपनी सात वर्षीय बेटी को भी स्कूल में लेकर आई थी। जो कि बेटी का स्कूल में पहला और आखिरी दिन साबित हुआ।

बेटी ने मना किया था इस रास्ते से नहीं चलना

स्कूल के अन्य अध्यापकों ने बताया कि संतोष कह रही थी कि उसकी कार नहर में गिरते-गिरते बची है। कार नहर से निकाली सिल्ट में फंस गईथी। उसी समय उसकी बच्ची ने कहा था कि मम्मी हम दूसरे रास्ते से जाएंगे। इस रास्ते से नहीं चलेंगे। इस रास्ते में मुझे डर लग रहा है। दूसरा रास्ता करीब चार किमी दूर पड़ता है।

एक चिता पर मां-बेटी का अंतिम संस्कार-

श्रीगंगानगर जिले में मां-बेटी की मौत के बाद शनिवार को बृजलालपुरा गांव में अंतिम संस्कार किया गया। दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार होते देख हर किसी की आंखें नम हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि मृतका का पति योगेश एयरफोर्स में कार्यरत है। योगेश और संतोष की शादी करीब दस साल पहली हुई थी। अध्यापिका संतोष 22 जून को ही बृजलालपुरा से पीहर बींझबायला गई थी।

Sunday, June 28, 2020

15 दिन तक मांग में सिंदूर सजाए बैठी रही पत्नी..उसे नहीं मालूम था कि उसका सुहाग उजड़ चुका है


जयपुर, राजस्थान. एक पत्नी के लिए यह कितना कष्टकर होगा कि उसे 15 दिन बाद पति की मौत की खबर मिले। यह महिला रोज अपनी मांग में सिंदूर भरती रही। उसे नहीं मालूम था कि अस्पताल में भर्ती उसके पति की मौत हो चुकी है। चूंकि कोरोना मरीजों के साथ किसी को रहने की इजाजत नहीं होती है, लिहाजा पत्नी और उसके बच्चे घर पर ही थे। लेकिन अस्पताल के फॉर्म में सही से जानकारियां नहीं भरने के कारण उसके पति की मौत की खबर पत्नी को 15 दिन बाद मिल सकी। 40 वर्षीय इस शख्स को 16 जून को पॉजिटिव होने पर अजमेर से जयपुर रैफर किया गया था। 24 जून को प्रतापनगर स्थित आरयूएचएस में उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने लाश को मर्चुरी में रखवा दिया था। 
मां को संभालती रही बड़ी बेटी..
हंसराज जोरावत अजमेर जिले के अराईं कस्बे से सटे देवपुरी गांव के रहने वाले थे। हंसराज 16 जून को कोरोना पॉजिटिव निकलने पर अजमेर से जयपुर रैफर किए गए थे। यहां उन्होंने अपना पता देवपुरी, किशनगढ़ लिखवा दिया था। वहीं, जो मोबाइल नंबर लिखे थे, वे हंसराज के ही थे। यानी वे बंद हो चुके थे। ऐसे में पुलिस ने काफी पड़ताल की, लेकिन उनका पता नहीं ढूढ़ सकी। लिहाजा, लाश मर्चुरी में रखवा दी। 15 दिन बाद पुलिस पता ढूंढ पाई और घर पर खबर पहुंचवाई। पत्नी अपनी बेटी को लेकर भागी-भागी जयपुर पहुंची। वहां पॉलिथीन में लिपटी पति की लाश देखकर फूट-फूटकर रो पड़ी। उसकी बेटी मां को दिलासा देती रही।

बड़ी बहन की गोद में था भाई

हंसराज का जब जयपुर के आदर्श नगर मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तब पत्नी दूर से हाथ जोड़कर उन्हें विदाई देती रही। इस बीच बड़ी बेटी मीनाक्षी अपने छोटे भाई को गोद में लिए मां को संभालती रही। हंसराज के घर का पता ढूंढने में प्रताप नगर थाने के सब इंस्पेक्टर सुंदरलाल और हेडकांस्टेबल किशन सिंह नाग ने काफी मेहनत की। हंसराज की किडनी खराब हो चुकी थीं। उन्हें बड़े भाई शिवराज ने मुखाग्नि दी।